संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग उठाते हुए भारत ने वीटो पावर के इस्तेमाल पर अपना रुख स्पष्ट किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्थनेनी हरीश ने 26 अक्टूबर 2026 को कहा कि वीटो का इस्तेमाल संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों को पूरा करने के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि वीटो केवल एक विशेष अधिकार नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है। इसका इस्तेमाल वैश्विक हितों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
भारत ने चिंता जताई कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की ओर से बार-बार वीटो का इस्तेमाल किए जाने से कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर फैसले प्रभावित होते हैं। इससे संयुक्त राष्ट्र की सबसे शक्तिशाली संस्था की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता पर भी सवाल उठते हैं। भारत का मानना है कि किसी एक देश के राजनीतिक हितों के कारण पूरी दुनिया की शांति और सुरक्षा से जुड़े जरूरी फैसले बाधित नहीं होने चाहिए।
भारत ने वीटो के इस्तेमाल में जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। वर्ष 2022 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव अपनाया था, जिसके तहत सुरक्षा परिषद के किसी स्थायी सदस्य द्वारा वीटो का इस्तेमाल किए जाने पर महासभा में चर्चा हो सकती है। हालांकि, भारत के अनुसार, केवल चर्चा करना पर्याप्त नहीं है। सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार करना भी जरूरी है, ताकि फैसले लेने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सके।
भारत ने सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए सदस्यता, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और काम करने के तरीकों में बदलाव की मांग की। भारत का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए परिषद में दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इसके लिए सभी प्रमुख मुद्दों पर एक साथ बातचीत शुरू करने और सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करने की जरूरत है।
भारत ने अफ्रीकी देशों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि यदि सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्य शामिल किए जाते हैं, तो उन्हें भी मौजूदा स्थायी सदस्यों के समान अधिकार मिलने चाहिए। नए स्थायी सदस्यों को वीटो के अधिकार से वंचित रखना समानता के सिद्धांत के खिलाफ होगा। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता के विस्तार की मांग करता रहा है।
भारत का स्पष्ट संदेश है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को किसी एक देश के हितों के बजाय पूरी दुनिया की जरूरतों को ध्यान में रखकर काम करना चाहिए। वीटो का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए होना चाहिए, न कि राजनीतिक स्वार्थों को पूरा करने के लिए। अब देखना होगा कि सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग पर सदस्य देश किस तरह सहमति बनाते हैं।




