मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को चुनाव आयोग के जवाबी हलफनामे पर अपना पक्ष रखने के लिए 10 दिन का समय दिया है। वहीं, चुनाव आयोग को भी अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने के लिए 10 दिन की मोहलत दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।
SIR प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची की जांच और उसमें जरूरी बदलाव करता है। इस प्रक्रिया को लेकर कई याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े कुछ फैसलों में पारदर्शिता की कमी रही है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि पूरी प्रक्रिया की जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से न हटाया जाए।
चुनाव आयोग ने अपने जवाब में इन आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े प्रमुख फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने फॉर्म-6 और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को लेकर भी अपना पक्ष रखा है। उसके अनुसार, 21 अक्टूबर से ऑनलाइन प्रक्रिया में फॉर्म-6 और SIR से संबंधित घोषणा को अलग-अलग दिखाने की व्यवस्था की गई है, ताकि आवेदन प्रक्रिया को लेकर भ्रम की स्थिति न बने।
इस विवाद को लेकर विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता बनाए रखना और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना जरूरी है।
अब सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई में याचिकाकर्ताओं और चुनाव आयोग के पक्ष पर विचार करेगा। फिलहाल, अदालत ने मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। ऐसे में 17 नवंबर को होने वाली सुनवाई अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े विवाद पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।




