विरोध के नाम पर अनिश्चितकाल तक जगह पर कब्जा नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों को लेकर अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति या संगठन प्रदर्शन के नाम पर किसी सार्वजनिक जगह पर अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं कर सकता। प्रदर्शन के लिए तय जगहों पर भी समय सीमा होनी चाहिए, ताकि दूसरे लोगों को भी अपनी बात रखने का मौका मिल सके।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी जंतर-मंतर पर हुए विपक्षी दलों के प्रदर्शन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि किसी एक समूह को हमेशा के लिए प्रदर्शन स्थल पर कब्जा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। वहां दूसरे संगठनों और लोगों को भी प्रदर्शन करने का अधिकार है।

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि प्रदर्शन के लिए एक दिन की अनुमति दी गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने करीब 17 दिनों तक जगह खाली नहीं की। इस मामले में दिल्ली के व्यापारियों ने भी अदालत में अपनी परेशानी रखी। उनका कहना है कि लगातार प्रदर्शनों और रास्ते बंद होने से कारोबार प्रभावित होता है और आम लोगों को भी परेशानी होती है।

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया था। इसके बदले रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD मैदान को प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक जगहों के रूप में तय किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोगों का अधिकार है, लेकिन इसके साथ आम जनता, व्यापारियों और दूसरे नागरिकों के अधिकारों का भी ध्यान रखना जरूरी है।