जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) को बड़ा झटका लगा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार और पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी के बीच सांसद रुहुल्लाह मेहदी ने पार्टी छोड़ने और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। उनके इस फैसले से जम्मू-कश्मीर की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
दरअसल, 3 नवंबर को बडगाम में एक जनसभा के दौरान रुहुल्लाह मेहदी ने पार्टी नेतृत्व पर चुनावी वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अनुच्छेद 370 की बहाली, राजनीतिक बंदियों की रिहाई और जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों की रक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था। लेकिन सत्ता में आने के बाद इन मुद्दों पर अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए।
रुहुल्लाह मेहदी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने रोजगार, आरक्षण व्यवस्था में सुधार, 200 यूनिट मुफ्त बिजली और हर साल 12 मुफ्त गैस सिलेंडर देने जैसे चुनावी वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, पार्टी अपने पुराने राजनीतिक सिद्धांतों और जनता से किए गए वादों से दूर होती जा रही है।
वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर विधायकों की नाराजगी भी पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बनी हुई है। 27 अक्टूबर को हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद करीब 25 विधायकों के नाराज होने की खबरें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि इन विधायकों ने मंत्रिमंडल में बदलाव और मंत्रियों के चयन को लेकर अपनी असहमति जाहिर की है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को अपनी मांगों पर विचार करने के लिए 14 दिनों का समय देने की बात भी कही है।
ऐसे में एक तरफ सांसद रुहुल्लाह मेहदी का पार्टी छोड़ने का ऐलान और दूसरी तरफ विधायकों की नाराजगी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस की अंदरूनी चुनौतियों को बढ़ा दिया है। अब देखना होगा कि उमर अब्दुल्ला और पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस असंतोष को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है।





