उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को पीलीभीत के बीसलपुर क्षेत्र में आयोजित श्रीराम कथा के समापन समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने रामराज्य की अवधारणा पर अपने विचार रखे। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामराज्य का मतलब ऐसी व्यवस्था से है, जहां किसी के साथ भेदभाव और तुष्टिकरण न हो, बल्कि समाज के हर वर्ग को सुरक्षा, सम्मान और आगे बढ़ने का समान अवसर मिले।
ग्राम नूरानपुर स्थित गोरक्ष पीठ आश्रम के शिव मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा कि किसान, नौजवान, व्यापारी और बेटियों समेत सभी को सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए। उन्होंने वर्ष 2017 से पहले प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस समय दंगे और अराजकता की स्थिति थी, जबकि अब प्रदेश में सुरक्षा का बेहतर माहौल बना है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में संतों के महत्व पर भी बात की। उन्होंने कहा कि संतों का सानिध्य समाज को अच्छी दिशा देने का काम करता है। धार्मिक आयोजनों से लोगों के मन में सकारात्मक विचार आते हैं और उन्हें अच्छे रास्ते पर चलने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने मंच पर मौजूद संतों का स्वागत और सम्मान भी किया।
सीएम योगी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए हुए लंबे संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 500 वर्षों के संघर्ष के बाद राम मंदिर का निर्माण संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले अयोध्या में सड़क और आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी थी, लेकिन अब शहर का तेजी से विकास हुआ है। अयोध्या सड़क, रेल और हवाई मार्ग से जुड़ चुकी है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने छह नवंबर को होने वाले दीपोत्सव का भी जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन और बरेली के धार्मिक स्थलों के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों का विकास हमारी संस्कृति और विरासत को सुरक्षित रखने के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि रामकथा और रामलीला भारतीय संस्कृति की पहचान हैं। इनके माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्श, मर्यादा और जीवन के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाता है।
कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री संजय गंगवार, एमएलसी सुधीर गुप्ता, संजीव प्रताप सिंह, विधायक बाबूराम पासवान और विवेक वर्मा समेत कई जनप्रतिनिधि, संत और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने सभी का अभिवादन करते हुए जय श्रीराम का उद्घोष किया।





