पीलीभीत में सीएम योगी ने किया अमृत सरोवर का लोकार्पण, श्री शंकर मंदिर में की पूजा-अर्चना

पीलीभीत: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 3 नवंबर 2026 को पीलीभीत जिले का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने अमृत सरोवर का लोकार्पण किया और श्री शंकर मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जल संरक्षण, ग्रामीण विकास और धार्मिक स्थलों के महत्व को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। उनके दौरे के दौरान विकास कार्यों के साथ धार्मिक गतिविधियां भी प्रमुख रूप से देखने को मिलीं।

अमृत सरोवर का लोकार्पण ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों में तालाबों का निर्माण और पुराने तालाबों का सुधार करना है, ताकि वर्षा के पानी को इकट्ठा करके उसका उपयोग किया जा सके। इससे भूजल स्तर को बनाए रखने, पानी की कमी दूर करने और पर्यावरण को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। अमृत सरोवर ग्रामीण जीवन में जल की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ गांवों के प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

अमृत सरोवर के विकास से स्थानीय लोगों को भी कई तरह के लाभ मिल सकते हैं। तालाबों में पानी जमा होने से आसपास के क्षेत्रों में जल स्तर बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा ऐसे जल स्रोत पशु-पक्षियों और पर्यावरण के लिए भी उपयोगी होते हैं। गांवों में तालाबों का विकास होने से सार्वजनिक स्थानों को बेहतर बनाने और जल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने का अवसर भी मिलता है। ऐसे प्रयास भविष्य में पानी की जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो सकते हैं।

इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्री शंकर मंदिर में पहुंचकर पूजा-अर्चना की। उन्होंने विधि-विधान से भगवान शिव की आराधना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान धार्मिक परंपराओं के प्रति उनकी आस्था देखने को मिली। मुख्यमंत्री का यह दौरा जिले में विकास और धार्मिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार प्रदेश में विकास कार्यों के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण पर भी जोर देते रहे हैं। पीलीभीत में अमृत सरोवर का लोकार्पण जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, वहीं श्री शंकर मंदिर में पूजा-अर्चना प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सम्मान को दर्शाती है। इस दौरे के माध्यम से जल संरक्षण, पर्यावरण और आस्था से जुड़े विषयों को प्रमुखता मिली।