समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और जौहर ट्रस्ट से जुड़े मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच तेज कर दी है। अब शत्रु संपत्ति पर कथित कब्जे और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है। ऐसे में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले आजम खान की रिहाई मुश्किल मानी जा रही है।
दरअसल, आजम खान को दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद रिहाई का रास्ता साफ हुआ था, लेकिन इसके तुरंत बाद ED की कार्रवाई के चलते उन्हें दोबारा जेल जाना पड़ा। गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में डासना जेल भेज दिया। अब ED शत्रु संपत्ति और जौहर ट्रस्ट से जुड़े मामलों में उनसे पूछताछ की तैयारी कर रही है।
यह मामला रामपुर के सिंघनखेड़ा गांव की करीब 34 एकड़ शत्रु संपत्ति से जुड़ा है। आरोप है कि इस जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा करके जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में इस्तेमाल किया गया। शत्रु संपत्ति उन लोगों की संपत्ति होती है, जो भारत छोड़कर पाकिस्तान या चीन चले गए हों। जांच एजेंसियों का आरोप है कि जमीन से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड में भी बदलाव किए गए और दस्तावेजों में हेरफेर की गई। इस मामले में आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम का नाम भी सामने आया है।
ED जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी में पैसों के लेन-देन की भी जांच कर रही है। 28 अक्टूबर को एजेंसी ने जौहर यूनिवर्सिटी की 426.46 करोड़ रुपये की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच किया था। इन संपत्तियों की अनुमानित बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये बताई गई है। जांच में सरकारी ठेकों की रकम, चंदे और सरकारी विकास निधि के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है।
आजम खान ने साल 1990 में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की स्थापना की थी। उनकी पत्नी, बेटे और परिवार के अन्य सदस्य भी इस ट्रस्ट से जुड़े हैं। ED अब ट्रस्ट के दूसरे सदस्यों और आजम खान के करीबियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, पूछताछ के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और आरोप पत्र दाखिल करने की तैयारी हो सकती है।
फिलहाल आजम खान की कानूनी मुश्किलें खत्म होती नजर नहीं आ रही हैं। एक मामले में जमानत मिलने के बावजूद दूसरे मामलों में कार्रवाई जारी है। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले उनकी जेल से रिहाई पर सवाल बने हुए हैं। हालांकि, अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई और जांच के नतीजों पर निर्भर करेगा।





