देश के प्रमुख कारोबारी समूह टाटा ग्रुप में नेतृत्व और भविष्य की रणनीति को लेकर विवाद तेज होता नजर आ रहा है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा 7 नवंबर को टाटा स्टील की बोर्ड बैठक में आमने-सामने होंगे। इस बैठक में कंपनी के दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजों को मंजूरी दी जानी है। हालांकि, दोनों के बीच मतभेदों को देखते हुए इस बैठक पर कारोबारी जगत की नजरें टिकी हुई हैं।
टाटा संस, टाटा ग्रुप की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है, जबकि टाटा ट्रस्ट्स की इसमें करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। विवाद का एक प्रमुख मुद्दा एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति से जुड़ा है। सितंबर में हुई बोर्ड बैठक में उन्हें फरवरी 2027 में मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद पांच साल के लिए फिर से चेयरमैन नियुक्त करने के प्रस्ताव को समर्थन मिला था। हालांकि, नोएल टाटा ने इस फैसले का विरोध किया था।
रिपोर्टों के अनुसार, नोएल टाटा ने 26 अक्टूबर को टाटा संस के कंपनी सचिव को पत्र लिखकर चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नियुक्ति का प्रस्ताव बैठक के निर्धारित एजेंडे में शामिल नहीं था। साथ ही, उन्होंने बैठक की बिना संपादन वाली वीडियो रिकॉर्डिंग और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की। इस घटनाक्रम ने टाटा ग्रुप के भीतर चल रहे मतभेदों को और चर्चा में ला दिया है।
विवाद का दूसरा अहम मुद्दा टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग है। भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के तहत टाटा संस की नियामकीय स्थिति के कारण कंपनी पर शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की आवश्यकता लागू हो सकती है। हालांकि, नोएल टाटा कंपनी को निजी बनाए रखने के पक्ष में बताए जा रहे हैं। इस मुद्दे पर मतभेद टाटा संस की भविष्य की रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
अब 7 नवंबर की टाटा स्टील बोर्ड बैठक पर सभी की नजरें रहेंगी। बैठक का आधिकारिक उद्देश्य कंपनी के वित्तीय नतीजों को मंजूरी देना है, लेकिन चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच मतभेदों के कारण यह बैठक चर्चा में है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि टाटा ग्रुप के नेतृत्व, चंद्रशेखरन के अगले कार्यकाल और टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।





