सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा की छात्रा आकृति चौधरी की NSA हिरासत से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2 सितंबर के आदेश के अहम हिस्सों पर फिलहाल रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने आकृति की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत को रद्द करते हुए उन्हें ₹5 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया था। इस रकम की वसूली गौतम बुद्ध नगर की तत्कालीन जिलाधिकारी मेधा रूपम और मामले में शामिल अन्य अधिकारियों के वेतन से करने को कहा गया था।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने 23 सितंबर को मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले के पैराग्राफ 27 से 33 के अमल पर अंतरिम रोक लगा दी है। इन्हीं हिस्सों में अधिकारियों पर की गई टिप्पणियां और ₹5 लाख मुआवजे की वसूली से जुड़ा निर्देश शामिल था। मामले पर आगे सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी|
यह मामला अप्रैल 2026 में नोएडा में औद्योगिक कर्मचारियों के प्रदर्शन से जुड़ा है। दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी को प्रदर्शन के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन पर NSA लगाया गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को उनकी हिरासत को रद्द करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ NSA जैसी सख्त कार्रवाई को सही ठहराने के लिए पर्याप्त विश्वसनीय सामग्री सामने नहीं रखी गई। हाईकोर्ट ने उनकी रिहाई का भी निर्देश दिया था, बशर्ते किसी दूसरे मामले में उनकी जरूरत न हो।
सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार और मेधा रूपम की ओर से हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई। सरकार की ओर से दलील दी गई कि NSA के तहत हिरासत की प्रक्रिया केवल जिलाधिकारी के स्तर पर नहीं हुई थी। प्रस्ताव SHO से शुरू होकर पुलिस और प्रशासन के कई स्तरों से गुजरने के बाद जिलाधिकारी तक पहुंचा था। इसके बाद भी मामले की वैधानिक स्तर पर समीक्षा हुई थी। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल उठाया कि पूरी प्रक्रिया में कई अधिकारी शामिल होने के बावजूद सिर्फ जिलाधिकारी को ₹5 लाख की जिम्मेदारी कैसे दी जा सकती है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का आदेश अंतरिम है। इसका मतलब यह है कि हाईकोर्ट के संबंधित निर्देशों पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट मामले की अगली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों पर विस्तार से विचार करेगा। तब तक ₹5 लाख की वसूली और हाईकोर्ट की संबंधित टिप्पणियों पर रोक जारी रहेगी।





