संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की हाई लेवल मीटिंग के बीच अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। रुबियो ने कहा कि दुनिया का मौजूदा इंटरनेशनल सिस्टम बड़े और गंभीर संघर्षों को सुलझाने में प्रभावी साबित नहीं हो रहा है। उन्होंने संभावित भारत-पाकिस्तान संघर्ष का भी उदाहरण दिया।
न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रुबियो ने कहा कि अगर कोई प्रभावी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था मौजूद होती, तो वह भारत और पाकिस्तान जैसे देशों के बीच पैदा होने वाले संभावित तनाव से निपटने में मदद कर सकती थी। उन्होंने थाईलैंड-कंबोडिया विवाद, रवांडा और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थिति, सूडान और ईरान से जुड़े तनावों का भी जिक्र किया। रुबियो के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था कई बड़े संघर्षों को रोकने या सुलझाने में अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से नहीं निभा पा रही है।
रुबियो ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और दूसरी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की अपनी उपयोगिता है, लेकिन उनका मानना है कि मौजूदा सिस्टम अपने मूल उद्देश्य से आगे बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि UN में मौजूद कई नेताओं के बीच इस बात को लेकर सहमति दिखाई दे रही है कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को उसके मूल उद्देश्य और भूमिका पर दोबारा केंद्रित करने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका इन संस्थाओं के महत्व को समझता है और इसी वजह से UN में मौजूद है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जब अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं किसी विवाद को प्रभावी तरीके से सुलझाने में नाकाम रहती हैं, तो देश अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका भी अपने राष्ट्रीय हितों को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से ऊपर रखेगा। यह बयान अमेरिकी विदेश नीति में ‘अमेरिका फर्स्ट’ दृष्टिकोण को भी दर्शाता है।
रुबियो का यह बयान ऐसे समय आया है जब UNGA में दुनिया के कई बड़े संघर्षों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका पर चर्चा हो रही है। भारत-पाकिस्तान के संदर्भ में रुबियो ने कोई नई अमेरिकी पहल या मध्यस्थता की घोषणा नहीं की, बल्कि दोनों देशों के बीच संभावित तनाव को मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की सीमाओं के उदाहरण के तौर पर पेश किया।
इस बयान से एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की प्रभावशीलता और बड़े वैश्विक विवादों को सुलझाने की उनकी क्षमता पर बहस तेज हो गई है। रुबियो के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था को उसके मूल उद्देश्य और भूमिका पर वापस लाने की जरूरत है, ताकि वह दुनिया में बढ़ते संघर्षों से प्रभावी तरीके से निपट सके।




