उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। इसी बीच अक्टूबर में होने वाले राज्यसभा और विधान परिषद के चुनाव ने प्रदेश की राजनीति को और गर्म कर दिया है। राज्यसभा की 10 और विधान परिषद की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एक अहम राजनीतिक परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।
राज्यसभा की 10 सीटों के लिए मतदान 16 अक्टूबर को होगा। इनमें से ज्यादातर सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर में खत्म हो रहा है, जबकि एक सीट पूर्व राज्यसभा सदस्य दिनेश शर्मा के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। राज्यसभा चुनाव में यूपी विधानसभा के मौजूदा संख्या बल के आधार पर बीजेपी और उसके सहयोगी दल मजबूत स्थिति में हैं, जबकि समाजवादी पार्टी भी अपनी सीटें सुरक्षित करने की स्थिति में है। असली दिलचस्पी उन सीटों को लेकर है, जहां अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ सकती है और क्रॉस-वोटिंग या फ्लोर मैनेजमेंट की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
राज्यसभा चुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें विधायकों के वोट से फैसला होता है। ऐसे में पार्टियों के लिए सिर्फ संख्या बल ही नहीं, बल्कि अपने विधायकों को एकजुट रखना भी बड़ी चुनौती होती है। 2027 से कुछ महीने पहले होने वाला यह चुनाव पार्टियों की अंदरूनी एकजुटता और नेतृत्व की रणनीति को परखने का मौका देगा।
इसके एक सप्ताह बाद 23 अक्टूबर को यूपी विधान परिषद की 11 सीटों के लिए चुनाव होगा। इनमें 5 स्नातक और 6 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल हैं। इन चुनावों में आम विधानसभा चुनाव की तरह सभी मतदाता वोट नहीं करते, बल्कि संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के पंजीकृत स्नातक और शिक्षक मतदाता मतदान करते हैं। इसलिए इन चुनावों को पढ़े-लिखे वर्ग और शिक्षक समुदाय के बीच राजनीतिक रुझान समझने के एक संकेतक के तौर पर भी देखा जा रहा है।
MLC चुनाव समाजवादी पार्टी के लिए एक अलग वजह से महत्वपूर्ण है। 100 सदस्यीय यूपी विधान परिषद में फिलहाल सपा के 10 सदस्य हैं। नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए सदन की कुल सदस्य संख्या का कम से कम 10 प्रतिशत होना जरूरी है। इसलिए इन चुनावों के नतीजे सपा की विधान परिषद में स्थिति पर भी असर डाल सकते हैं।
बीजेपी के लिए इन चुनावों में संगठन की तैयारी और जमीनी नेटवर्क की परीक्षा होगी। पार्टी 2027 को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पहुंच बढ़ाने और अपने संगठन को मजबूत करने पर जोर दे रही है। वहीं सपा के लिए ये चुनाव अपने संगठन और PDA रणनीति को जमीन पर परखने का अवसर हैं। हालांकि इन चुनावों के नतीजों को सीधे 2027 विधानसभा चुनाव का परिणाम मानना सही नहीं होगा, क्योंकि दोनों चुनावों की मतदान प्रक्रिया और मतदाता अलग हैं।
यही वजह है कि राज्यसभा और MLC चुनाव को 2027 का ‘सेमीफाइनल’ कहा जा रहा है। इन चुनावों से पार्टियों को अपनी रणनीति, संगठन और चुनावी तैयारी की कमियां समझने का मौका मिलेगा। इसके बाद 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल अपने समीकरण और रणनीति में बदलाव भी कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव फरवरी-मार्च 2027 में निर्धारित हैं और मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल मई 2027 में समाप्त होगा।




