भारत और जर्मनी के बीच आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। दोनों देश व्यापार, रक्षा, तकनीक और निवेश के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। बदलते वैश्विक हालात के बीच भारत-जर्मनी साझेदारी को दोनों देशों के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA को लेकर भी बड़ी प्रगति हुई है। जनवरी 2026 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच FTA वार्ता पूरी हो चुकी है। अब समझौते को औपचारिक रूप देने के लिए जरूरी प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं। इसके लागू होने के बाद भारत और यूरोप के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। समझौते के तहत यूरोपीय संघ के करीब 96.6 प्रतिशत टैरिफ में कटौती का प्रावधान है। इससे भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिल सकती है और यूरोपीय कंपनियों के लिए भी भारत में कारोबार के अवसर बढ़ सकते हैं।
रक्षा क्षेत्र में भी भारत और जर्मनी के बीच सहयोग तेजी से आगे बढ़ रहा है। दोनों देश रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन के साथ-साथ आधुनिक रक्षा तकनीक में साझेदारी बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग को मजबूत करना भी इस साझेदारी का अहम हिस्सा है।
इसी बीच जर्मनी की ओर से भारत के प्रोजेक्ट-75I के तहत छह आधुनिक पारंपरिक पनडुब्बियों की संभावित डील में भी रुचि दिखाई गई है। यह सौदा करीब 8 अरब डॉलर का बताया जा रहा है। जर्मन पक्ष के अनुसार उसकी ओर से जरूरी दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और अब भारत की मंजूरी का इंतजार है।
भारत और जर्मनी वर्ष 2026 में अपने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ भी मना रहे हैं। ऐसे समय में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक, शिक्षा और हरित विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश रिश्तों को नई दिशा दे सकती है। आने वाले समय में FTA और रक्षा सहयोग से जुड़े फैसले भारत-जर्मनी साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।





