UNSC सुधार पर रूस का बड़ा बयान, एर्दोगन की वीटो खत्म करने की मांग को समर्थन नहीं

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार को लेकर रूस और तुर्की के अलग-अलग रुख सामने आए हैं। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने सुरक्षा परिषद की मौजूदा व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग की है। उन्होंने स्थायी सदस्यता और वीटो पावर की मौजूदा व्यवस्था को खत्म करने की वकालत की है। उनका कहना है कि दुनिया की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र की निर्णय प्रक्रिया में अधिक देशों को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

एर्दोगन के मुताबिक, सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की परिस्थितियों पर आधारित है। उनका तर्क है कि आज दुनिया की स्थिति काफी बदल चुकी है और संयुक्त राष्ट्र में अधिक देशों की आवाज को जगह मिलनी चाहिए। उन्होंने ऐसी व्यवस्था की बात कही है, जिसमें सुरक्षा परिषद के सदस्य तय अवधि के लिए चुने जाएं और किसी एक देश के पास किसी प्रस्ताव को लंबे समय तक रोकने की विशेष शक्ति न हो।

हालांकि, रूस ने वीटो पावर खत्म करने के इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया है। रूस का कहना है कि सुरक्षा परिषद में सुधार जरूरी है और इसमें नए स्थायी सदस्यों को शामिल किया जाना चाहिए, लेकिन मौजूदा स्थायी सदस्यों की वीटो पावर को बनाए रखना जरूरी है। रूस के अनुसार, वीटो सुरक्षा परिषद की मौजूदा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

UNSC सुधार का मुद्दा भारत के लिए भी बेहद अहम है। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। भारत का तर्क है कि आज की वैश्विक वास्तविकताओं को देखते हुए सुरक्षा परिषद में विकासशील देशों और अलग-अलग क्षेत्रों का बेहतर प्रतिनिधित्व होना चाहिए। भारत यह भी कह चुका है कि अगर नए स्थायी सदस्य बनाए जाते हैं, तो उन्हें मौजूदा व्यवस्था के अनुरूप अधिकार दिए जाने चाहिए।

रूस का भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी के प्रति समर्थन भी महत्वपूर्ण माना जाता है। BRICS के मंच पर रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत तथा भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका की आकांक्षा के समर्थन की बात दोहराई है।

इस पूरे मुद्दे से साफ है कि UNSC सुधार को लेकर देशों के बीच सहमति तो है कि मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है, लेकिन सुधार किस तरह किया जाए, इस पर मतभेद बने हुए हैं। एर्दोगन वीटो व्यवस्था को खत्म करने की मांग कर रहे हैं, जबकि रूस स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने के साथ वीटो पावर बनाए रखने के पक्ष में है। वहीं भारत सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्व वाला बनाने और स्थायी सदस्यता में विस्तार की मांग कर रहा है।