सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि अदालत को मछली बाजार न बनाया जाए। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने वकीलों से अपनी बात बारी-बारी से रखने को कहा। उन्होंने साफ किया कि अदालत में अनुशासन बनाए रखना जरूरी है, ताकि सभी पक्षों को अपनी बात रखने का मौका मिल सके।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शनों और इस दौरान पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। इसी मामले में व्यापारियों ने भी याचिका दाखिल की है। उनका कहना है कि लंबे समय से चल रहे प्रदर्शनों के कारण बाजारों में कारोबार प्रभावित हुआ है। दुकानों तक ग्राहकों की पहुंच कम हुई है और व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। व्यापारियों की ओर से त्योहारों के दौरान दिल्ली में दो महीने तक धरना-प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग भी की गई।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन किसी एक व्यक्ति या संगठन को किसी निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर अनिश्चित समय तक कब्जा करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर एक संगठन लंबे समय तक किसी जगह पर बैठा रहेगा, तो किसान, मजदूर, पत्रकार और दूसरे संगठन अपनी बात कहने के लिए कहां जाएंगे। अदालत ने कहा कि प्रदर्शन स्थलों के लिए एक तय समय-सीमा होनी चाहिए, ताकि सभी को अपनी बात रखने का मौका मिल सके।
कोर्ट ने यह भी कहा कि विरोध करने के अधिकार और व्यापार करने के अधिकार के बीच संतुलन जरूरी है। प्रदर्शन के कारण आम लोगों, छोटे दुकानदारों और रोज कमाकर परिवार चलाने वाले लोगों की आजीविका प्रभावित नहीं होनी चाहिए। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रदर्शन के लिए दी गई अनुमति का पालन करना जरूरी है। उनके मुताबिक, जुलाई में एक दिन के प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारी 17 दिनों तक वहां बैठे रहे और बाद में संसद की ओर मार्च करने की कोशिश भी की।
सुप्रीम कोर्ट ने व्यापारियों की याचिका पर केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस सहित संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अदालत ने व्यापारियों से प्रदर्शन आयोजित करने वाले संगठनों को भी मामले में पक्षकार बनाने को कहा है, ताकि उनकी बात सुने बिना कोई फैसला न लिया जाए। इसके अलावा सुनवाई में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई, लोगों को हिरासत में लेने और निगरानी के लिए CCTV व अन्य तकनीक के इस्तेमाल से जुड़े सवाल भी उठे। कोर्ट ने कहा कि इन सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।





