एआई निगरानी में संपन्न हुई स्पेशल टीईटी-2026, 87.92 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की नकलविहीन और पारदर्शी परीक्षा कराने की नीति के तहत विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (स्पेशल टीईटी-2026) मंगलवार, 3 नवंबर को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से आयोजित इस परीक्षा में कुल पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 87.92 प्रतिशत ने भाग लिया। परीक्षा की निगरानी के लिए पहली बार एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम की मदद ली गई, जहां से सभी परीक्षा केंद्रों पर लगे कैमरों के जरिए लाइव मॉनिटरिंग की गई।

यह परीक्षा प्रदेश के छह मंडल मुख्यालयों प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ और आगरा में दो पालियों में आयोजित की गई। पहली पाली में कक्षा 1 से 5 के लिए सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक परीक्षा हुई, जबकि दूसरी पाली में कक्षा 6 से 8 के लिए दोपहर 2:30 बजे से शाम 5 बजे तक परीक्षा कराई गई। आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि सभी केंद्रों पर परीक्षा निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ संपन्न हुई।

परीक्षा के दौरान एआई कैमरों और विशेष सॉफ्टवेयर के माध्यम से अभ्यर्थियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई। इस निगरानी व्यवस्था की मदद से लखनऊ के स्टेशन रोड स्थित बप्पा श्री नारायण वोकेशनल इंटर कॉलेज में एक फर्जी अभ्यर्थी पकड़ा गया। वह किसी दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा दे रहा था। उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।

आयोग के उप सचिव संजय सिंह के अनुसार, दोनों पालियों में कुल 93,681 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। पहली पाली में कक्षा 1 से 5 के लिए पंजीकृत 58,353 अभ्यर्थियों में से 50,666 उपस्थित रहे। इस पाली में उपस्थिति 86.80 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं, दूसरी पाली में कक्षा 6 से 8 के लिए पंजीकृत 48,194 अभ्यर्थियों में से 43,015 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी और उपस्थिति 89.25 प्रतिशत रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, महिला अभ्यर्थियों की उपस्थिति 89.25 प्रतिशत और पुरुष अभ्यर्थियों की उपस्थिति 89.28 प्रतिशत दर्ज की गई।

आयोग अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने परीक्षा के सफल आयोजन के लिए संबंधित मंडलों और जिलों के प्रशासन तथा पुलिस विभाग का आभार जताया। एआई आधारित निगरानी व्यवस्था के इस्तेमाल को परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और नकल पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह आयोजन प्रदेश में तकनीक की मदद से निष्पक्ष और व्यवस्थित परीक्षाएं कराने के सरकार के प्रयासों को भी दर्शाता है।