केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टाटा समूह के अंदर चल रहे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने समूह के नेतृत्व से अपील की है कि आपसी मतभेदों को सार्वजनिक करने के बजाय बातचीत के जरिए बंद कमरों में सुलझाया जाए। उन्होंने कहा कि टाटा समूह भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके विवाद का जल्द से जल्द समाधान होना चाहिए।
निर्मला सीतारमण ने सोमवार, 2 नवंबर को मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि इस तरह के संवेदनशील मामलों को सुलझाने के लिए कारोबारी समझ, आपसी सहयोग और परिपक्वता की जरूरत होती है। उन्होंने टाटा समूह की वैश्विक पहचान और देश की अर्थव्यवस्था में उसके योगदान का भी जिक्र किया। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि सरकार इस विवाद में हस्तक्षेप करेगी या नहीं।
दरअसल, टाटा समूह में यह विवाद टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के बीच मतभेदों को लेकर है। विवाद के दो प्रमुख मुद्दे हैं। पहला, टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध यानी लिस्ट कराने का फैसला और दूसरा, एन. चंद्रशेखरन को चेयरमैन के पद पर दोबारा नियुक्त करना।
यह मामला 17 सितंबर को हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक के बाद सार्वजनिक हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने टाटा संस की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन रद्द करने की मांग को स्वीकार नहीं किया था। इसके बाद टाटा संस के बोर्ड ने शेयर बाजार में लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने और चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को मंजूरी दी। इन फैसलों पर नोएल टाटा ने असहमति जताई थी।
गौरतलब है कि टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि शापूरजी पलोनजी समूह के पास लगभग 18.4 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच चल रहा विवाद समूह के भविष्य और उसकी कारोबारी योजनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई कि टाटा समूह का नेतृत्व आपसी बातचीत से इस मामले को जल्द सुलझाएगा और समूह में पहले जैसी सामान्य स्थिति बहाल होगी।





