हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस विधायक नंद लाल के निधन के बाद रामपुर विधानसभा सीट खाली हो गई है। इसके बाद 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस सीट पर उपचुनाव होने की संभावना को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या निर्वाचन आयोग अगले विधानसभा चुनाव से पहले रामपुर सीट पर उपचुनाव कराएगा या फिर मतदाताओं को सीधे 2027 के चुनाव का इंतजार करना होगा।
नंद लाल रामपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक थे। उनके निधन के बाद हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विधायकों की संख्या 68 से घटकर 67 रह गई है। इस खाली सीट पर चुनाव कराने का फैसला भारत निर्वाचन आयोग को लेना है।
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 151A के अनुसार, विधानसभा की कोई सीट खाली होने पर सामान्य तौर पर छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना जरूरी होता है। हालांकि, अगर विधानसभा का बाकी कार्यकाल एक साल से कम है, तो इस नियम में छूट मिल सकती है। इसके अलावा, निर्वाचन आयोग विशेष परिस्थितियों में भी उपचुनाव कराने की समय सीमा में छूट दे सकता है।
रामपुर सीट के मामले में उपचुनाव की संभावना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि हिमाचल प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। ऐसे में निर्वाचन आयोग को विधानसभा के बचे हुए कार्यकाल और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखकर फैसला लेना होगा।
फिलहाल रामपुर सीट पर उपचुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग की ओर से कोई आधिकारिक कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है। अब सबकी नजर आयोग के अगले फैसले पर है। अगर उपचुनाव होता है, तो 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले रामपुर सीट पर राजनीतिक दलों के बीच एक और अहम मुकाबला देखने को मिल सकता है।





