नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय में एक मामले की सुनवाई के दौरान उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई, जब एक वकील ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के खिलाफ कथित रूप से अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। घटना के बाद अदालत में मौजूद न्यायाधीशों और अन्य वकीलों ने इस व्यवहार पर कड़ी आपत्ति जताई।
बताया जा रहा है कि सुनवाई के दौरान किसी कानूनी मुद्दे पर बहस के बीच वकील ने आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। अदालत ने इस व्यवहार को न्यायपालिका की गरिमा के विरुद्ध बताते हुए नाराजगी व्यक्त की। न्यायाधीशों ने स्पष्ट कहा कि अदालत में सभी पक्षों से शालीन और सम्मानजनक भाषा की अपेक्षा की जाती है।
घटना के बाद मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी गई। यदि अदालत यह मानती है कि किसी व्यक्ति के आचरण से न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंची है, तो उसके खिलाफ अवमानना (Contempt of Court) सहित अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायपालिका की आलोचना और अदालत की कार्यवाही के दौरान अभद्र व्यवहार, दोनों अलग-अलग बातें हैं। अदालत में अनुशासन बनाए रखना प्रत्येक अधिवक्ता और पक्षकार की जिम्मेदारी है।
फिलहाल इस मामले में न्यायालय की ओर से आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। यदि दोष सिद्ध होता है, तो संबंधित वकील के खिलाफ नियमों के अनुसार उचित कदम उठाए जा सकते हैं।




