स्वतंत्र भारद्वाज मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- ‘अगर असामाजिक तत्व खुले घूम रहे हैं तो यह गंभीर मामला है

सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शन और उससे जुड़े हिंसा के मामलों की सुनवाई के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज समेत कथित हिंसक तत्वों को लेकर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि अगर ऐसे लोग खुले घूम रहे हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है, तो यह गंभीर मामला है। यह टिप्पणी दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और उसके बाद दर्ज मामलों की सुनवाई के दौरान सामने आई।

मामला जुलाई 2026 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प और हिंसा के आरोप लगे थे। केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया था कि प्रदर्शन में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हो गए थे, जिनके खिलाफ पहले से गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। सरकार ने ऐसे करीब 2,800 से अधिक लोगों की पहचान किए जाने की बात कही थी।

सुप्रीम कोर्ट ने बाद में अधिकांश प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR बंद करने का आदेश दिया, लेकिन गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 लोगों को इससे बाहर रखा। अदालत के आदेश के मुताबिक इन लोगों से जुड़े मामलों की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है।इसी विवाद के बीच स्वतंत्र भारद्वाज का नाम भी सामने आया। उन पर CJP के प्रदर्शन के दौरान छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट करने का आरोप है। भारद्वाज से जुड़े एक कथित वीडियो में उन्होंने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावा किया था। मामले में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और अदालत में पेश किया था। हालांकि, उनके खिलाफ लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली सुनवाई और सबूतों पर निर्भर करेगी।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और हिंसा में शामिल कथित आपराधिक तत्वों के बीच अंतर किया जाना जरूरी है। अदालत ने भी स्पष्ट किया कि छात्रों को विरोध प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन गंभीर आपराधिक आरोपों वाले मामलों को केवल प्रदर्शन का हिस्सा होने के आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की स्वतंत्र जांच की जरूरत पर भी जोर दिया है। अदालत के सामने पुलिस की कथित ज्यादतियों और प्रदर्शनकारियों की ओर से हुई हिंसा, दोनों पक्षों के आरोप रखे गए हैं। इसलिए पूरे घटनाक्रम में किसकी क्या भूमिका थी, इसका निर्धारण जांच और अदालत में पेश होने वाले सबूतों के आधार पर ही होगा।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामलों को लेकर सरकार, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। अदालत का रुख साफ है कि शांतिपूर्ण विरोध करने वाले छात्रों के अधिकारों की रक्षा जरूरी है, लेकिन अगर किसी व्यक्ति पर गंभीर आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के विश्वसनीय आरोप हैं, तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई भी होनी चाहिए।