मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक बार फिर चर्चा में हैं। केरल सरकार ने उनके खिलाफ करीब 20 साल पुराने रिश्वत मांगने के आरोपों की दोबारा जांच कराने का फैसला किया है। आरोप है कि वर्ष 2006 में केरल के लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव रहते हुए उन्होंने सड़क निर्माण परियोजना का भुगतान जारी करने के बदले 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी।
यह मामला केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जिसमें भारत और मलेशिया की संयुक्त कंपनी PATI-BEL काम कर रही थी। शिकायतकर्ता साजन के मुताबिक, परियोजना के करीब 17 करोड़ रुपये के बिल मंजूर होने के बावजूद भुगतान रोक दिया गया था। उनका आरोप है कि इसी भुगतान को जारी करने के लिए रिश्वत मांगी गई थी।
इस मामले में कंपनी के मलेशियाई प्रोजेक्ट मैनेजर ली सी बीन का नाम भी सामने आया है। नवंबर 2005 में उन्होंने मलेशिया में आत्महत्या कर ली थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने अपने सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का जिक्र किया था। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है।
इस मामले की जांच वर्ष 2006 में भी हुई थी, लेकिन पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कारण इसे बंद कर दिया गया था। अब नई शिकायत के बाद केरल सरकार ने विजिलेंस विभाग को दोबारा जांच के निर्देश दिए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि पिछली जांच में कई अहम लोगों के बयान नहीं लिए गए थे।
राजनीतिक रूप से भी यह मामला चर्चा में है। केरल में करीब 10 साल बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता में आया है। ऐसे में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ पुराने आरोपों की जांच शुरू होने से सियासी हलचल बढ़ गई है। फिलहाल ज्ञानेश कुमार पर लगे आरोप साबित नहीं हुए हैं। अब विजिलेंस जांच के बाद ही मामले की सच्चाई सामने आएगी।





