SIR पर चुनाव आयोग के हलफनामे पर बोले पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त, फैसलों को लेकर कही यह बात

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी विवाद के बीच पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत का बयान सामने आया है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट किया है कि SIR से जुड़े फैसले आयोग के तीनों सदस्यों की सहमति से लिए गए थे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ओपी रावत ने आयोग के जवाब पर भरोसा जताने और तथ्यों के आधार पर मामले को समझने की बात कही।

ओपी रावत ने कहा कि जब चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके अपना पक्ष रखा है, तो उसमें दिए गए जवाब को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने बताया कि आयोग के फैसले निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं और उनसे जुड़े दस्तावेजों में निर्णयों का रिकॉर्ड मौजूद रहता है। हालांकि, पूरे मामले के सभी पहलुओं को समझने के लिए संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों को देखना भी जरूरी है।

दरअसल, चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा फैसले लेने के आरोपों को खारिज किया है। आयोग के अनुसार, SIR से संबंधित आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से जारी किए गए थे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। SIR के दौरान मांगा गया अतिरिक्त घोषणा-पत्र इससे अलग है।

हालांकि, ओपी रावत ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर उठ रहे सवालों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी संवैधानिक संस्था की साख पर सवाल उठने के बाद जनता का भरोसा बनाए रखना महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) से जुड़ी शिकायतों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों के कारणों की जांच होनी चाहिए और जरूरत के अनुसार सुधार किए जाने चाहिए।

रावत के मुताबिक, चुनाव आयोग को अपने फैसलों और प्रक्रियाओं के बारे में समय पर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि लोगों के मन में संदेह की स्थिति न बने। SIR को लेकर चुनाव आयोग के जवाब और विपक्ष की आपत्तियों के बीच अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। अदालत में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि संबंधित पक्षों की दलीलों और कानूनी पहलुओं पर आगे क्या रुख सामने आता है।