मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ममूटी इन दिनों अपने नेशनल फिल्म अवॉर्ड के साथ-साथ एक वीडियो को लेकर भी चर्चा में हैं। दरअसल, नेशनल फिल्म अवॉर्ड समारोह के दौरान ममूटी का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। इस दौरान उनके माथे पर तिलक लगाया गया और उन्हें तिरंगे रंग का पारंपरिक शॉल पहनाया गया। वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद कुछ लोगों ने ममूटी के मुस्लिम होने का हवाला देते हुए तिलक लगाने पर सवाल उठाए।
मामला बढ़ने के बाद अभिनेता और फिल्ममेकर हरिश्री यूसुफ ने ममूटी का बचाव किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर ऐसे कमेंट करने वालों को जवाब देते हुए कहा कि किसी पारंपरिक स्वागत को सिर्फ धर्म के नजरिए से देखना सही नहीं है। उनके मुताबिक, तिलक कई जगहों पर सम्मान और स्वागत की परंपरा का हिस्सा है और इसे किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान से जोड़ना जरूरी नहीं है।
हरिश्री यूसुफ ने धर्म और परंपरा को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अलग-अलग धर्मों और समुदायों में सम्मान जताने के अलग-अलग तरीके होते हैं। किसी के लिए तिलक, किसी के लिए क्रॉस का निशान और किसी के लिए नमाज आस्था का हिस्सा हो सकती है। उनका कहना था कि धर्म का उद्देश्य इंसान को बेहतर बनाना है, न कि लोगों के बीच भेदभाव या नफरत पैदा करना।
यूसुफ ने ममूटी के सामाजिक और चैरिटी से जुड़े कामों का भी जिक्र किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर धर्म के नाम पर किसी व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। उनके मुताबिक, किसी व्यक्ति के काम और उसके योगदान को सिर्फ उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।
बता दें कि ममूटी को फिल्म ‘ब्रह्मयुगम’ में उनके अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला है। समारोह में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सम्मानित किया। इसी कार्यक्रम के दौरान उनके पारंपरिक स्वागत का वीडियो सामने आया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तिलक को लेकर बहस शुरू हो गई। हरिश्री यूसुफ की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है।





