उत्तर प्रदेश में पिछले तीन दिनों से जारी भारी बारिश और तेज हवाओं ने कई जिलों में हालात बिगाड़ दिए हैं। राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार, 25 सितंबर से 27 सितंबर की सुबह तक बारिश और तूफान से जुड़ी घटनाओं में 56 लोगों की मौत हुई, जबकि 46 लोग घायल हुए हैं। कई इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं और राहत तथा बचाव टीमें प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटी हैं।
बारिश से सबसे ज्यादा मौतें सीतापुर में दर्ज हुई हैं, जहां सात लोगों की जान गई। इसके बाद लखीमपुर खीरी, बहराइच और बलरामपुर में पांच-पांच मौतें हुईं, जबकि अयोध्या और गोरखपुर में चार-चार लोगों की मौत दर्ज की गई। हरदोई में सात लोग घायल हुए, जबकि मैनपुरी और श्रावस्ती में पांच-पांच लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
बारिश की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 25 से 27 सितंबर के बीच राज्य में सामान्य से काफी अधिक बारिश दर्ज हुई। अधिकारियों के अनुसार, 24 घंटे में राज्य में 45.1 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश करीब 1.8 मिलीमीटर रहती है। एक अन्य आधिकारिक आकलन के मुताबिक 48 घंटे में औसत बारिश 66.5 मिलीमीटर रही, जबकि सामान्य आंकड़ा 7.6 मिलीमीटर है।
लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, घाघरा और राप्ती कई निगरानी केंद्रों पर बढ़ती हुई स्थिति में हैं। बाराबंकी के एल्गिन ब्रिज पर घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया, जबकि अयोध्या में भी नदी चेतावनी स्तर से ऊपर बह रही थी। बलरामपुर में राप्ती का जलस्तर भी चेतावनी स्तर को पार कर चुका था।
भारी बारिश के कारण 1,021 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। पेड़ और बिजली के खंभे गिरने से कई जगह यातायात और बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। खेतों में पानी भरने और तेज हवाओं के कारण खड़ी फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों के मुताबिक फसल नुकसान का आकलन अभी जारी है।
मौसम विभाग के अनुसार, बारिश के पीछे बंगाल की खाड़ी से आया एक डीप डिप्रेशन और उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के बीच संभावित इंटरैक्शन को प्रमुख कारण माना जा रहा है। रविवार सुबह तक डिप्रेशन कमजोर होकर वेल-मार्क्ड लो-प्रेशर एरिया में बदल गया, जिससे बारिश की तीव्रता में कुछ कमी आने की संभावना जताई गई।
प्रशासन ने प्रभावित जिलों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिए हैं। अधिकारियों को जलभराव वाले क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने, क्षतिग्रस्त मकानों का आकलन करने और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों, तेज बहाव वाली नदियों और नालों के पास अनावश्यक रूप से जाने से बचने की अपील की गई है।




