भारत और अमेरिका के बीच रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर जारी तनाव के बीच भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने अमेरिका की नीति पर बड़ा दावा किया है। 27 सितंबर 2026 को NDTV Defence Summit में बोलते हुए अलीपोव ने कहा कि इस साल नई दिल्ली में हुए Raisina Dialogue के दौरान एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कथित तौर पर कहा था कि अमेरिका भारत को चीन जैसा अगला प्रतिस्पर्धी बनने नहीं देगा। अलीपोव ने इसे “Freudian slip” यानी अनजाने में सामने आई सोच बताया। हालांकि, इस कथित टिप्पणी की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं हुई है।
अलीपोव ने कहा कि जैसे-जैसे भारत आर्थिक और रणनीतिक रूप से मजबूत होता जाएगा, अमेरिका की ओर से उसे लेकर दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत का एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभरना तय है और उनके अनुसार वॉशिंगटन भारत को सीमित करने की कोशिश कर सकता है। ये अलीपोव के अपने आकलन और दावे हैं, जिन्हें अमेरिकी सरकार की आधिकारिक नीति के रूप में पेश नहीं किया गया है।
रूसी राजदूत ने अपनी टिप्पणी को अमेरिका के नए Graham Act से भी जोड़ा। Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर कुछ परिस्थितियों में 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है। भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है, इसलिए यह कानून नई दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण है।
अलीपोव ने भारत की रूस से तेल खरीद का बचाव करते हुए कहा कि भारत यह खरीद रूस का समर्थन करने के लिए नहीं, बल्कि अपनी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए करता है। उनके मुताबिक, रूसी तेल प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध है और भारत ने इस मुद्दे पर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखी है।
उन्होंने भारत-रूस संबंधों को भी लंबे समय से चले आ रहे भरोसे और सहयोग पर आधारित बताया। अलीपोव के अनुसार, दोनों देशों ने अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद अपने संबंधों को किसी तत्काल वैश्विक समीकरण से नहीं जोड़ा और इसे “zero-sum game” के रूप में नहीं देखा। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के राजनयिक संबंध अगले वर्ष 80 वर्ष पूरे करेंगे।अलीपोव की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत एक तरफ रूस के साथ रक्षा और ऊर्जा संबंध बनाए हुए है, वहीं अमेरिका के साथ भी रक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग जारी है। भारत ने हाल के वर्षों में अमेरिकी सैन्य प्लेटफॉर्म भी खरीदे हैं, जबकि रूस के साथ BrahMos जैसे संयुक्त रक्षा कार्यक्रम और बड़े पैमाने पर सैन्य सहयोग लंबे समय से मौजूद हैं।
फिलहाल “अमेरिका भारत को अगला चीन बनने से रोकेगा” वाली कथित टिप्पणी का स्वतंत्र रिकॉर्ड या अमेरिकी अधिकारी की पहचान सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। इसलिए इसे रूसी राजदूत द्वारा किया गया दावा मानना अधिक सटीक है, न कि अमेरिकी सरकार की घोषित नीति।




