उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी ने अपनी मीडिया रणनीति को भी मजबूत करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 26 सितंबर को सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं और अन्य प्रवक्ताओं के साथ करीब दो घंटे तक बैठक की। बैठक में टीवी डिबेट, सोशल मीडिया और पार्टी की छवि को लेकर कई अहम निर्देश दिए गए।
अखिलेश यादव ने प्रवक्ताओं से साफ कहा कि बिना पूरी तैयारी के किसी भी टीवी डिबेट में शामिल नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि किसी मुद्दे की पूरी जानकारी न होने पर उस पर बयान देने से बचना बेहतर है। प्रवक्ताओं को सलाह दी गई कि किसी भी विषय पर पार्टी का पक्ष रखने से पहले उससे जुड़े तथ्यों और जानकारी को अच्छी तरह समझ लें। पार्टी का मानना है कि टीवी डिबेट में प्रवक्ता की बात को सिर्फ उसका व्यक्तिगत बयान नहीं, बल्कि पार्टी के रुख के तौर पर देखा जाता है।
बैठक में जाति और धर्म से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भी सावधानी बरतने को कहा गया। अखिलेश यादव ने प्रवक्ताओं से कहा कि ऐसे बयान देने से बचें, जिनसे किसी समुदाय या व्यक्ति की भावनाएं आहत हो सकती हैं। साथ ही भाषा और शब्दों के चुनाव पर भी ध्यान देने की नसीहत दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि हर मुद्दे पर बोलना जरूरी नहीं है और कई बार सही समय पर चुप रहना भी महत्वपूर्ण होता है।
सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अखिलेश यादव ने प्रवक्ताओं को वायरल होने वाले छोटे वीडियो और रील्स को लेकर भी सतर्क किया। उन्होंने कहा कि आज किसी नेता या प्रवक्ता की कही गई बात कुछ ही सेकंड में सोशल मीडिया पर तेजी से फैल सकती है। ऐसे में 10 सेकंड की एक रील भी पार्टी की छवि बनाने या बिगाड़ने में भूमिका निभा सकती है। इसलिए प्रवक्ताओं को तथ्यों के आधार पर और पार्टी की आधिकारिक लाइन के अनुसार ही अपनी बात रखने की सलाह दी गई।
सपा की इस बैठक को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की मीडिया और संचार रणनीति को व्यवस्थित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी अब अपने प्रवक्ताओं से ज्यादा तैयारी, संयमित भाषा और स्पष्ट तरीके से पार्टी का पक्ष रखने की उम्मीद कर रही है।





