संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भाषण के दौरान कई देशों के प्रतिनिधियों ने विरोध में सभागार से बाहर निकलकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस पर नेतन्याहू ने वहां मौजूद और बाहर जाने वाले प्रतिनिधियों को ‘मोरल काउर्ड्स’ यानी ‘नैतिक कायर’ कहा। इसके एक दिन बाद आइसलैंड की विदेश मंत्री थोरगेरदुर कैटरीन गुन्नार्सदोतिर ने इसी शब्द का इस्तेमाल करते हुए नेतन्याहू को जवाब दिया।
आइसलैंड की विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि दुनिया ने इसी मंच से ‘मोरल काउर्ड्स’ शब्द सुना है। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार असली नैतिक कायर वे नेता हैं जो न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के लिए बातचीत करने से इनकार करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरतमंद लोगों तक मानवीय सहायता पहुंचने से रोकना और अंतरराष्ट्रीय कानून का बार-बार उल्लंघन करना भी नैतिक कायरता है।
दरअसल, 24 सितंबर को नेतन्याहू के संयुक्त राष्ट्र में पहुंचने से पहले और उनके भाषण के दौरान कई देशों के प्रतिनिधियों ने सभागार से वॉकआउट किया था। इसके बाद नेतन्याहू ने अपने भाषण में बाहर जाने वाले प्रतिनिधियों को ‘मोरल काउर्ड्स’ कहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि इजरायल अपने बचाव में उन देशों की भी सुरक्षा कर रहा है, जिनके प्रतिनिधि उनके भाषण के दौरान बाहर चले गए।
इस पूरे विवाद के बीच आइसलैंड का रुख भी चर्चा में रहा। नेतन्याहू के भाषण के दौरान आइसलैंड का प्रतिनिधि अपनी सीट पर मौजूद रहा था, हालांकि विदेश मंत्री उस समय सभागार में नहीं थीं। वह उसी समय फिलिस्तीनी शरणार्थियों की सहायता से जुड़े UNRWA कार्यक्रम में शामिल थीं। आइसलैंड के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान सीट पर प्रतिनिधि मौजूद रखना वहां की लंबे समय से चली आ रही परंपरा है और इसे नेतन्याहू के भाषण के समर्थन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
आइसलैंड की विदेश मंत्री ने कहा कि गाजा में मानवीय स्थिति, मानवीय सहायता और दो-राष्ट्र समाधान को लेकर उनके देश का रुख स्पष्ट है। आइसलैंड ने गाजा में मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच और इजरायल-फिलिस्तीन के बीच दो-राष्ट्र समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया है।
इस बयान के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजरायल और उसके आलोचक देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक मतभेद एक बार फिर सामने आए हैं। नेतन्याहू के ‘मोरल काउर्ड्स’ वाले बयान को आइसलैंड की विदेश मंत्री ने शांति, मानवीय सहायता और अंतरराष्ट्रीय कानून के मुद्दों से जोड़कर जवाब दिया।





