बहराइच की हजरत सैयद सालार मसूद गाजी दरगाह में करोड़ों के चढ़ावे की हेराफेरी का आरोप, 10 वर्षों का ऑडिट रिकॉर्ड गायब

बहराइच (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के बहराइच स्थित हजरत सैयद सालार मसूद गाजी दरगाह (वक्फ नंबर-19) एक बार फिर विवादों में आ गई है। दरगाह में पिछले 10 से 20 वर्षों के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के चढ़ावे और दान में कथित अनियमितताओं तथा हेराफेरी के आरोप सामने आए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार ने जांच शुरू कर दी है।

प्रारंभिक जांच में सबसे बड़ा सवाल यह उठा है कि दरगाह प्रबंधन पिछले लगभग 10 वर्षों का वित्तीय रिकॉर्ड और ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध नहीं करा सका। जांच अधिकारियों के अनुसार, चढ़ावे से प्राप्त आय, उसके उपयोग और खर्च का समुचित हिसाब-किताब प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसी कारण वित्तीय लेनदेन में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, दरगाह पर हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु जियारत के लिए पहुंचते हैं। उर्स और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान बड़ी मात्रा में नकद चढ़ावा, दान और अन्य आर्थिक सहयोग प्राप्त होता है। आरोप है कि इन पैसों का सही तरीके से लेखा-जोखा नहीं रखा गया और कई वर्षों तक ऑडिट प्रक्रिया भी नहीं कराई गई।मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने दरगाह से जुड़े वित्तीय दस्तावेज, बैंक खातों और चढ़ावे के रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। संबंधित अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या सरकारी नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित अनियमितताएं केवल रिकॉर्ड रखने में लापरवाही का परिणाम हैं या फिर चढ़ावे की राशि का दुरुपयोग और गबन किया गया है। इसके लिए पिछले कई वर्षों के बैंकिंग लेनदेन, वक्फ से जुड़े दस्तावेज और अन्य वित्तीय अभिलेखों की गहन पड़ताल की जा रही है।

फिलहाल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और किसी भी व्यक्ति या संस्था को दोषी नहीं ठहराया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों और दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यदि हेराफेरी के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।