सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि जिन प्रदर्शनकारियों या हिरासत में लिए गए लोगों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके मामलों पर अलग से विचार किया जाए। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक व्यक्ति के रिकॉर्ड की जांच कर कानून के अनुसार उचित निर्णय लिया जाए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं या जिन पर हिंसा अथवा अन्य गंभीर आरोप हैं, उनके मामलों का निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा। वहीं, जिन लोगों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और जिनके खिलाफ गंभीर आरोप नहीं हैं, उनके संबंध में कानून के अनुरूप राहत देने पर विचार किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन किसी भी व्यक्ति के साथ केवल आशंका के आधार पर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। प्रत्येक मामले का निर्णय उसके तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।



