भारत के थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक लगातार कम होना चिंता का विषय बन गया है। 9 सितंबर 2026 तक देश के 59 कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार गंभीर स्तर पर पहुंच गया था। इन संयंत्रों में या तो निर्धारित स्टॉक का 25 प्रतिशत से भी कम कोयला बचा है या फिर वे तीन दिनों से कम समय तक बिजली उत्पादन कर सकते हैं। अगस्त के अंत में ऐसे संयंत्रों की संख्या 45 थी, यानी कुछ ही दिनों में स्थिति और गंभीर हुई है।
कोयले के स्टॉक में कमी की एक बड़ी वजह इस साल बिजली की बढ़ी हुई मांग है। लंबे समय से जारी गर्मी के कारण लोगों ने कूलर और एयर कंडीशनर का ज्यादा इस्तेमाल किया, जिससे बिजली की खपत बढ़ गई। सितंबर में भी देश की पीक पावर डिमांड 260 गीगावाट से ऊपर पहुंच चुकी है। इसके अलावा मानसून के दौरान भारी बारिश ने कोयला खदानों से बिजली संयंत्रों तक कोयला पहुंचाने की प्रक्रिया को भी प्रभावित किया।

हालांकि, फिलहाल इसे देशव्यापी बिजली संकट कहना जल्दबाजी होगी। सरकार ने स्थिति संभालने के लिए कोयले की सप्लाई बढ़ाने के कदम उठाए हैं। 6 सितंबर तक कोयला परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली रेल रेक की संख्या 370 से बढ़कर 444 प्रतिदिन हो गई थी। कोल इंडिया ने भी अपनी खदानों से सड़क मार्ग के जरिए अतिरिक्त कोयला भेजना शुरू किया है। सरकार के मुताबिक देश में कुल मिलाकर करीब 123.7 मिलियन टन कोयला स्टॉक उपलब्ध है, जिसमें बिजली संयंत्रों के बाहर खदानों और ट्रांजिट में मौजूद कोयला भी शामिल है।
फिर भी बिजली क्षेत्र के लिए चुनौती बनी हुई है, क्योंकि भारत की बिजली व्यवस्था में कोयला आधारित उत्पादन की अहम भूमिका है। अगर कुछ संयंत्रों में स्टॉक लंबे समय तक कम रहता है और बिजली की मांग ऊंची बनी रहती है, तो स्थानीय स्तर पर बिजली कटौती या सप्लाई में दबाव देखने को मिल सकता है। पंजाब जैसे कुछ राज्यों में कम कोयला स्टॉक और पावर प्लांट्स की तकनीकी समस्याओं के कारण बिजली आपूर्ति पर पहले ही दबाव की खबरें सामने आई हैं।

आने वाले दिनों में स्थिति काफी हद तक कोयले की आपूर्ति और बिजली की मांग पर निर्भर करेगी। अगर मानसून कमजोर पड़ता है, कोयले की ढुलाई सामान्य होती है और खदानों से सप्लाई बढ़ती है, तो पावर प्लांट्स के स्टॉक में सुधार हो सकता है। लेकिन अगर गर्मी और बिजली की मांग लंबे समय तक बनी रहती है, तो कम कोयला भंडार सरकार और बिजली कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। फिलहाल देशव्यापी बिजली संकट की स्थिति नहीं है, लेकिन 59 संयंत्रों में गंभीर रूप से कम स्टॉक एक स्पष्ट चेतावनी जरूर है कि ईंधन आपूर्ति पर लगातार नजर रखना जरूरी है।




