अभिजीत दीपके, सौरभ दास या आशुतोष रांका सोनम वांगचुक की ‘मदद’ के लिए नहीं गए, लगाई थी

बिल्कुल, इसे ज्यादा पॉलिश्ड, न्यूज़ वेबसाइट के हिसाब से प्रोफेशनल और आसान भाषा में इस तरह लिखा जा सकता है:लद्दाख में सोनम वांगचुक की पदयात्रा को लेकर एक बार फिर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) चर्चा में है। वांगचुक ने लद्दाख के मुद्दों को लेकर निकाली जा रही पदयात्रा में CJP के नेताओं से भी शामिल होने की अपील की थी। हालांकि, 23 सितंबर को लेह में हुई इस पदयात्रा में CJP के प्रमुख चेहरे अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका नजर नहीं आए।

सोनम वांगचुक ने इससे पहले एक वीडियो संदेश के जरिए CJP के लोगों से लद्दाख पहुंचने और आंदोलन में सहयोग करने की अपील की थी। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपने पिछले अनशन का जिक्र करते हुए कहा था कि जिस तरह उस दौरान उन्हें समर्थन मिला, उसी तरह अब वह लद्दाख के मुद्दे पर CJP से सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं। उनकी इस अपील पर अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ‘Stand with Ladakh’ लिखकर समर्थन जताया था। हालांकि, दीपके, सौरभ दास या आशुतोष रांका में से किसी ने लद्दाख जाकर पदयात्रा में शामिल होने की घोषणा नहीं की थी।

वांगचुक ने पहले 19 से 24 सितंबर तक पदयात्रा निकालने की योजना बनाई थी, लेकिन खराब मौसम के कारण कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ा। इसके बाद 23 सितंबर को लेह में एक दिन की प्रतीकात्मक पदयात्रा निकाली गई। इसमें लद्दाख के स्थानीय लोगों के साथ दूसरे राज्यों से आए कुछ लोग भी शामिल हुए। हालांकि, CJP के ये तीनों प्रमुख नेता पदयात्रा में दिखाई नहीं दिए।पदयात्रा के दौरान वांगचुक ने कहा कि उन्होंने शुरुआत में ज्यादा से ज्यादा लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की थी, लेकिन बाद में इस पर ज्यादा जोर नहीं दिया।

उन्होंने कहा कि जो लोग पहुंचे, उनका स्वागत किया गया। ऐसे में CJP नेताओं की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल जरूर उठे हैं, लेकिन इन तीनों नेताओं की ओर से लद्दाख नहीं पहुंचने की कोई स्पष्ट वजह सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आई है।

सोनम वांगचुक और CJP नेतृत्व के बीच इससे पहले भी संगठन की भूमिका को लेकर चर्चा हो चुकी है। अगस्त में वांगचुक ने कहा था कि CJP का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका के अपने राजनीतिक हित हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा था कि वह चाहते हैं कि CJP एक दबाव समूह के रूप में काम करे और इसे सीधे राजनीतिक मंच न बनाया जाए।

फिलहाल, वांगचुक की पदयात्रा और CJP नेताओं की गैरमौजूदगी ने दोनों के बीच सहयोग को लेकर चर्चा जरूर बढ़ा दी है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि CJP के तीनों नेताओं ने पदयात्रा में शामिल न होने का फैसला किस वजह से लिया।