आज शी जिनपिंग चीन के सबसे शक्तिशाली नेताओं में गिने जाते हैं। लेकिन सत्ता के इस शिखर तक पहुंचने से पहले उनका जीवन कई उतार-चढ़ाव से गुजरा। उन्हें अक्सर ‘प्रिंसिलिंग’ यानी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रभावशाली नेताओं के परिवार से आने वाला नेता कहा जाता है। उनके पिता शी झोंगशुन चीन के वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेताओं में शामिल थे और देश की सरकार में अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके थे। हालांकि, सांस्कृतिक क्रांति के दौर में परिवार की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति अचानक बदल गई।
शी जिनपिंग का जन्म 1953 में बीजिंग में हुआ था। बचपन का शुरुआती दौर सुविधाओं में बीता, लेकिन बाद में उनके परिवार को राजनीतिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उनके पिता को पद से हटा दिया गया और राजनीतिक उत्पीड़न झेलना पड़ा। इसका असर पूरे परिवार पर पड़ा और शी जिनपिंग का जीवन भी पहले जैसी सुविधाओं से दूर हो गया।
करीब 15 साल की उम्र में शी जिनपिंग को शान्शी प्रांत के लियांगजियाहे गांव भेज दिया गया। यहां उन्होंने लगभग सात साल किसानों के बीच रहकर बिताए। वह साधारण परिस्थितियों में रहते थे और खेती, पशुपालन समेत गांव के कई काम करते थे। यही वह दौर था जब उन्होंने ग्रामीण चीन की गरीबी, मुश्किलों और आम लोगों की जिंदगी को करीब से देखा।
गांव में रहते हुए शी जिनपिंग ने कम्युनिस्ट पार्टी में अपनी राजनीतिक यात्रा आगे बढ़ाई। बाद में वह गांव के पार्टी प्रमुख भी बने। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की और चीन के अलग-अलग हिस्सों में पार्टी और प्रशासन से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। हेबेई से शुरू हुई उनकी राजनीतिक यात्रा फुजियान, झेजियांग और फिर शंघाई तक पहुंची। शंघाई में पार्टी प्रमुख बनने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में उनका कद तेजी से बढ़ा।
2012 में शी जिनपिंग चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेता बने और 2013 में उन्होंने चीन के राष्ट्रपति का पद संभाला। इसके बाद उन्होंने चीन की राजनीति और शासन व्यवस्था में अपनी पकड़ लगातार मजबूत की। आज वह चीन की सत्ता के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल हैं।
शी जिनपिंग की राजनीतिक यात्रा को समझने के लिए उनके शुरुआती जीवन को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। एक ओर उन्हें शक्तिशाली राजनीतिक परिवार की पृष्ठभूमि मिली, वहीं दूसरी ओर किशोरावस्था में उन्होंने परिवार के राजनीतिक पतन और कठिन ग्रामीण जीवन का अनुभव किया। यही विरोधाभास उनकी कहानी को अलग बनाता है—एक ऐसा ‘राजकुमार’ जिसने पहले सत्ता और विशेषाधिकार देखे, फिर मुश्किलों का सामना किया और अंत में चीन के सर्वोच्च नेतृत्व तक पहुंचा।




