ग्रीनलैंड में अमेरिका बनाएगा दो नए सैन्य बेस, ट्रंप ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ किया सुरक्षा समझौता

अमेरिका ने ग्रीनलैंड को लेकर डेनमार्क और वहां की सरकार के साथ एक बड़ा सुरक्षा समझौता किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने 22 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते का उद्देश्य आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करना है।

समझौते के तहत अमेरिका दक्षिणी ग्रीनलैंड के नार्सार्सुआक और पूर्वी हिस्से के मेस्टर्सविग में दो अतिरिक्त डिफेंस एरिया स्थापित कर सकेगा। नार्सार्सुआक में पहले अमेरिकी सैन्य अड्डा हुआ करता था, जिसे 1958 में बंद कर दिया गया था। वहीं मेस्टर्सविग में फिलहाल डेनमार्क की विशेष सैन्य इकाई की मौजूदगी है। इसके अलावा अमेरिका को ग्रीनलैंड में मौजूद पिटुफिक स्पेस बेस को आधुनिक बनाने और उसका विस्तार करने की अनुमति मिलेगी।

इस समझौते से अमेरिका को ग्रीनलैंड में अपने सैन्य विमानों, जहाजों और सैनिकों की आवाजाही के लिए व्यापक अधिकार मिलेंगे। समझौते में यह भी कहा गया है कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर भविष्य में अतिरिक्त डिफेंस एरिया का प्रस्ताव रख सकता है, लेकिन इसके लिए संबंधित पक्षों के बीच सहमति की प्रक्रिया तय की गई है। समझौता NATO की आर्कटिक क्षेत्र में भूमिका, निगरानी और संयुक्त सुरक्षा सहयोग को भी मजबूत करने पर जोर देता है।

ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बीच स्थित है और आर्कटिक क्षेत्र में रूस तथा चीन की बढ़ती रणनीतिक गतिविधियों को लेकर अमेरिका और NATO की चिंताएं हैं। नए समझौते के तहत गैर-NATO देशों को ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी स्थापित करने से रोका गया है, जबकि कुछ संवेदनशील विदेशी निवेशों पर भी सुरक्षा के आधार पर रोक लगाई जा सकती है।

यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब ट्रंप लंबे समय से ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लाने की इच्छा जाहिर करते रहे हैं। इस मुद्दे पर अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच कई महीनों तक तनाव रहा। हालांकि नए समझौते में ग्रीनलैंड की संप्रभुता और उसके लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का उल्लेख किया गया है। समझौते की कोई तय समाप्ति तारीख भी नहीं है और इसमें भविष्य में ग्रीनलैंड के स्वतंत्र होने की स्थिति से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।

इस तरह नया समझौता ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को काफी बढ़ाने का रास्ता खोलता है। साथ ही यह अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच आर्कटिक सुरक्षा को लेकर सहयोग को नए स्तर पर ले जाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।