दिल्ली SIR पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, 33 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नोटिस पर ECI से जवाब तलब

दिल्ली में चल रही Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को चुनाव आयोग से जवाब मांगा। मामला उन मतदाताओं को जारी किए गए नोटिस से जुड़ा है, जिन्हें चुनाव आयोग ने “logical discrepancy” या पुराने रिकॉर्ड से मैपिंग न होने जैसी श्रेणियों में रखा है। अदालत के सामने बताया गया कि करीब 33.13 लाख मतदाताओं को ऐसे नोटिस जारी किए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण मांगा। सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि कुछ नोटिस लगभग “mechanically” जारी होते दिखाई दे रहे हैं और ECI से पूछा कि “logical discrepancy” निर्धारित करने का आधार क्या है। कोर्ट ने यह भी कहा कि मतदाताओं को स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि उनके मामले में किस जानकारी या दस्तावेज की जरूरत है।

याचिकाकर्ताओं ने नोटिस पाने वाले मतदाताओं के नाम, नोटिस जारी करने के कारण और “logical discrepancy” तय करने के मानदंड सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका तर्क है कि अस्पष्ट कारणों के कारण प्रभावित मतदाताओं के लिए अपनी स्थिति स्पष्ट करना मुश्किल हो सकता है। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि बिना सुनवाई के किसी मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा।

अदालत ने चुनाव अधिकारियों को मतदाताओं की सहायता के लिए BLOs (Booth Level Officers) की भूमिका मजबूत करने और आवश्यक जानकारी को सरल तरीके से उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। सुप्रीम कोर्ट ने ECI से इस मामले में उठाए गए कदमों की status report भी मांगी है और मामले की अगली सुनवाई करीब दो सप्ताह बाद होगी। इस सुनवाई के बाद दिल्ली SIR में नोटिस की प्रक्रिया, पारदर्शिता और मतदाताओं को जवाब देने के लिए पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराने का मुद्दा प्रमुख हो गया है। हालांकि, किसी मतदाता को नोटिस मिलना अपने आप में उसका नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का अंतिम निर्णय नहीं है।