संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की भारत की लंबे समय से चली आ रही मांग को उस समय मजबूती मिली, जब संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया। संयुक्त राष्ट्र महासभा के अपने अंतिम संबोधन में गुटेरेस ने कहा कि दुनिया 1945 के दौर से काफी बदल चुकी है और वैश्विक संस्थाओं को भी आज की वास्तविकताओं के अनुरूप बदला जाना चाहिए।
गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्व वाला, प्रभावी और पारदर्शी बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने खास तौर पर विकासशील देशों और अफ्रीकी महाद्वीप के पर्याप्त प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि दुनिया के बड़े हिस्से को लंबे समय तक वैश्विक फैसले लेने वाली संस्थाओं में उचित प्रतिनिधित्व से दूर रखना संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता के लिए चुनौती है।
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने और विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग करता रहा है। वर्तमान में सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्य अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन हैं। इन पांचों देशों के पास वीटो पावर है, जबकि 10 अन्य सदस्य अस्थायी तौर पर चुने जाते हैं। भारत का तर्क रहा है कि आज की वैश्विक राजनीतिक, आर्थिक और जनसंख्या संबंधी वास्तविकताओं को सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना में पर्याप्त रूप से जगह नहीं मिली है।
भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और बड़े विकासशील देशों में शामिल है। भारत का कहना है कि वैश्विक निर्णय लेने वाली संस्थाओं में उन देशों को भी स्थायी भूमिका मिलनी चाहिए, जो वर्तमान वैश्विक व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
BRICS जैसे मंचों पर भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा लगातार उठता रहा है। BRICS देशों ने सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधि, लोकतांत्रिक और प्रभावी बनाने की जरूरत पर जोर दिया है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र महासचिव की ओर से सुधार की आवश्यकता पर दिया गया जोर भारत समेत विकासशील देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, महासचिव का समर्थन सुरक्षा परिषद की संरचना में तत्काल बदलाव नहीं करता। स्थायी सदस्यता बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच व्यापक सहमति और तय प्रक्रिया के तहत चार्टर में संशोधन जरूरी होगा। इसलिए सुरक्षा परिषद में सुधार की राह अभी भी लंबी है, लेकिन गुटेरेस का बयान इस मुद्दे को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश देता है।





