लद्दाख में पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग तेज, सोनम वांगचुक करेंगे पदयात्रा

लद्दाख में पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग एक बार फिर चर्चा में है। पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इस मांग को लेकर पदयात्रा करने जा रहे हैं। लद्दाख के स्थानीय संगठनों की प्रमुख मांगों में पूर्ण राज्य का दर्जा, जमीन और रोजगार की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों के लिए ज्यादा राजनीतिक अधिकार शामिल हैं।

लद्दाख को 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू-कश्मीर से अलग करके केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। इसके बाद लद्दाख में विधानसभा की व्यवस्था नहीं रखी गई। फिलहाल यहां प्रशासन केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त उपराज्यपाल के माध्यम से चलता है। लद्दाख के स्थानीय नेताओं और संगठनों का कहना है कि क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में स्थानीय लोगों की भागीदारी और अधिकार बढ़ाए जाने चाहिए।

पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने पर लद्दाख में निर्वाचित सरकार और विधानसभा की व्यवस्था हो सकती है। इससे स्थानीय प्रतिनिधियों को क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार कानून और नीतियां बनाने में ज्यादा भूमिका मिलेगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, रोजगार, सड़क और दूसरी स्थानीय सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया मजबूत हो सकती है।

लद्दाख में जमीन और रोजगार की सुरक्षा भी बड़ी चिंता है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि उनकी जमीन और रोजगार के अवसर सुरक्षित रहें और विकास का लाभ क्षेत्र के लोगों तक पहुंचे। इसके साथ ही लद्दाख की प्राकृतिक परिस्थितियों को देखते हुए पर्यावरण संरक्षण भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। अनियंत्रित पर्यटन, निर्माण और अन्य विकास गतिविधियों का स्थानीय पर्यावरण पर असर पड़ सकता है, इसलिए स्थानीय स्तर पर मजबूत भागीदारी की मांग की जा रही है।

लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा और छठी अनुसूची की मांग भी लंबे समय से उठती रही है। छठी अनुसूची के तहत आने वाले क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों को जमीन, जंगल, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय प्रशासन से जुड़े मामलों में विशेष अधिकार मिलते हैं। लद्दाख के आंदोलन से जुड़े लोग इसी तरह की सुरक्षा के जरिए अपनी जमीन, संस्कृति, भाषा और पारंपरिक पहचान को सुरक्षित रखना चाहते हैं।

सोनम वांगचुक की पदयात्रा इसी मांग को लेकर लोगों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश है। उनका आंदोलन लद्दाख के लिए ज्यादा राजनीतिक अधिकार, संवैधानिक सुरक्षा और स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर केंद्रित है। केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच इन मुद्दों पर बातचीत भी होती रही है। ऐसे में आने वाले समय में इस मांग को लेकर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, यह महत्वपूर्ण रहेगा।