लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में सामने आई खामियों को लेकर सरकार ने सख्त कदम उठाया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली PNC इंफ्राटेक और उससे जुड़ी अवध एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड को तीन साल के लिए नए प्रोजेक्ट्स के टेंडर में हिस्सा लेने से प्रतिबंधित कर दिया है। यह कार्रवाई एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में निर्माण संबंधी समस्याएं सामने आने के बाद की गई है। NHAI के आदेश के मुताबिक, प्रतिबंध की अवधि में कंपनी NHAI, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और संबंधित एजेंसियों की नई परियोजनाओं के लिए बोली नहीं लगा सकेगी।
करीब 63 किलोमीटर लंबे छह लेन वाले लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को लगभग 4,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इसका उद्घाटन जुलाई 2026 में हुआ था, लेकिन इसके कुछ समय बाद ही उन्नाव के पास एक्सप्रेसवे के करीब 300 मीटर हिस्से में सड़क धंसने की समस्या सामने आई। इसके अलावा कुछ हिस्सों में सड़क की ऊपरी परत उखड़ने और दरारें आने जैसी शिकायतें भी सामने आईं। मामले को गंभीरता से लेते हुए NHAI ने तकनीकी जांच कराई और प्रभावित हिस्सों की मरम्मत के निर्देश दिए। सड़क की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया की जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम के साथ IIT खड़गपुर की तकनीकी टीम की मदद भी ली गई।
NHAI की कार्रवाई का असर सिर्फ कंपनी के नए टेंडरों तक सीमित नहीं है। प्रभावित हिस्सों की मरम्मत का खर्च भी निर्माण कंपनी को ही उठाना होगा। मरम्मत पूरी होने तक कुछ समय के लिए टोल वसूली पर भी रोक लगाई गई थी, जिससे होने वाले नुकसान की भरपाई कंपनी से कराने की बात सामने आई है। कंपनी की ओर से NHAI के फैसले के खिलाफ उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार करने की बात कही गई है। अब एक्सप्रेसवे की तकनीकी जांच और स्थायी मरम्मत पर नजर रहेगी। इस पूरे मामले ने बड़े सड़क प्रोजेक्ट्स में निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और जिम्मेदारी तय करने को लेकर चर्चा तेज कर दी है।





