समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर NDA के भीतर चर्चा तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने के बयान के बाद अब तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने भी अपना रुख स्पष्ट किया है। आंध्र प्रदेश TDP के अध्यक्ष और गाजुवाका विधायक पी. श्रीनिवास राव ने कहा कि NDA की सहयोगी पार्टी होने के नाते TDP गृह मंत्री अमित शाह के बयान के साथ है और पार्टी उनके रुख के अनुसार आगे बढ़ेगी।
श्रीनिवास राव ने UCC को लेकर कहा कि इसके पक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि इससे देश की एकता मजबूत हो सकती है और कानूनों में लैंगिक भेदभाव कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि UCC को लेकर कुछ लोगों की आपत्तियां हैं। आलोचकों का कहना है कि इससे धार्मिक स्वतंत्रता और देश की सांस्कृतिक विविधता से जुड़े सवाल उठ सकते हैं। TDP की ओर से कहा गया कि इन तमाम चर्चाओं के बावजूद पार्टी NDA सहयोगी के तौर पर केंद्र के रुख के साथ आगे बढ़ेगी।
UCC का मतलब समान नागरिक संहिता है। इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों से जुड़े अलग-अलग धार्मिक कानूनों की जगह एक समान नागरिक कानून की व्यवस्था करना है। संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को पूरे देश में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने की बात कही गई है। हालांकि, इसे लागू करने के तरीके और इसके प्रावधानों को लेकर देश में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस होती रही है।
TDP का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि NDA के दूसरे सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया पूरी तरह एक जैसी नहीं रही है। जनता दल (यूनाइटेड) यानी JDU ने कहा है कि वह UCC के प्रस्तावित कानून का अध्ययन करने के बाद अपना रुख तय करेगा और जिन प्रावधानों पर आपत्ति होगी, उनका विरोध किया जाएगा। वहीं TDP ने फिलहाल खुद को केंद्र के रुख के साथ खड़ा किया है। ऐसे में आने वाले समय में UCC के प्रावधानों और इसे लागू करने की प्रक्रिया पर NDA के भीतर होने वाली चर्चा महत्वपूर्ण रहेगी।





