जंतर-मंतर से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाई-पावर्ड कमेटी को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। अदालत ने कमेटी की मौजूदा संरचना में किसी भी तरह का बदलाव करने से इनकार कर दिया है। सुनवाई के दौरान कमेटी के एक सदस्य को लेकर आपत्ति और हितों के टकराव की आशंका जताते हुए उन्हें बदलने की मांग की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आशंका के आधार पर कमेटी की निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता और अब यही कमेटी मामले की जांच आगे बढ़ाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को इस मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। कमेटी में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश शालिंदर कौर, पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के सेवानिवृत्त डीजीपी डॉ. एल.आर. बिश्नोई शामिल हैं। कमेटी को प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर किए गए अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों की ओर से हुई हिंसा, पुलिसकर्मियों को लगी चोटों और सार्वजनिक या निजी संपत्ति को हुए नुकसान की भी जांच करनी है।
जांच के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़ी शिकायतों को भी विशेष रूप से देखा जाना है। इनमें कथित यौन उत्पीड़न और उनके साथ हुई हिंसा के आरोप शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर देखने और जरूरी होने पर अंतरिम रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा कमेटी को पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों, पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों को अलग-अलग पहलुओं से जांचना है, ताकि मामले की पूरी तस्वीर सामने आ सके।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख के बाद अब हाई-पावर्ड कमेटी की मौजूदा टीम ही अपनी जांच जारी रखेगी। अदालत ने कमेटी पर न्यायिक निगरानी बनाए रखने की बात भी स्पष्ट की है। ऐसे में अब इस मामले में कमेटी की जांच और उसकी रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट आगे की सुनवाई में मामले से जुड़े कानूनी और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार करेगा।





