UPI चार्ज पर राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- ‘अमेरिकी दबाव के आगे सरेंडर’

UPI को लेकर केंद्र सरकार के नए फैसले पर सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने UPI पेमेंट पर Merchant Discount Rate यानी MDR लागू किए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए इसे अमेरिकी दबाव से जोड़ दिया और उन्हें “कॉम्प्रोमाइज्ड पीएम” बताते हुए कहा कि सरकार एक बार फिर अमेरिकी दबाव के आगे झुक रही है।

दरअसल, सरकार ने UPI के लिए नया शुल्क ढांचा जारी किया है। इसके तहत आम व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन पर किसी भी राशि के लिए MDR नहीं लगेगा। वहीं, ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट यानी दुकान या कारोबार से जुड़े भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के ऐसे लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे कुछ जरूरी क्षेत्रों के लिए ₹5 का फ्लैट MDR तय किया गया है। सरकार के मुताबिक करीब 96% मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।

राहुल गांधी का मुख्य सवाल यह है कि अगर मर्चेंट से शुल्क लिया जाएगा तो उसका असर आखिरकार ग्राहकों पर पड़ सकता है। उनका तर्क है कि दुकानदार अपनी लागत बढ़ने पर सामान या सेवाओं की कीमत बढ़ा सकते हैं। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी पेमेंट कंपनियां भारत की जीरो-MDR व्यवस्था का लंबे समय से विरोध करती रही हैं और सरकार का यह कदम उसी दबाव का नतीजा है। हालांकि, ये अमेरिकी दबाव से जुड़े आरोप राहुल गांधी और कांग्रेस के हैं। सरकार की ओर से कहा गया है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है और ग्राहक से सीधे यह शुल्क नहीं लिया जाएगा। सरकार के मुताबिक MDR का उद्देश्य बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप कंपनियों को डिजिटल पेमेंट के इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी और फ्रॉड रोकने जैसी व्यवस्थाओं में निवेश के लिए आर्थिक आधार देना है।

इस पूरे मुद्दे ने UPI के भविष्य और डिजिटल पेमेंट की लागत को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ सरकार इसे UPI सिस्टम को लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ बनाने की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे आम लोगों और व्यापारियों पर संभावित अतिरिक्त बोझ के तौर पर देख रही है। ऐसे में आने वाले समय में इस बात पर नजर रहेगी कि MDR का वास्तविक असर व्यापारियों और ग्राहकों पर कितना पड़ता है और UPI की लागत को लेकर सरकार आगे क्या कदम उठाती है।