लद्दाख के बेहद ऊंचे और मुश्किल इलाके में भारतीय वायुसेना ने एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन किया। करीब 18,500 फीट की ऊंचाई पर ट्रेकिंग कर रहीं चार महिला NCC कैडेट्स की तबीयत खराब हो गई थी। हालात को देखते हुए मदद के लिए SOS संदेश भेजा गया। सूचना मिलते ही भारतीय वायुसेना ने बिना देरी किए रेस्क्यू की तैयारी शुरू की और हेलीकॉप्टर के जरिए चारों कैडेट्स को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद उन्हें जरूरी इलाज और मेडिकल जांच के लिए लेह पहुंचाया गया।
इस रेस्क्यू ऑपरेशन को आसान नहीं माना जा रहा था, क्योंकि कैडेट्स जिस जगह थीं, वह काफी ऊंचाई पर और बेहद दुर्गम इलाका था। वहां हेलीकॉप्टर उतारने के लिए कोई तैयार हेलिपैड भी नहीं था। इसके अलावा इतनी ज्यादा ऊंचाई पर हवा कम होने के कारण हेलीकॉप्टर ऑपरेशन में भी काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। इसके बावजूद IAF की ‘सियाचिन पायनियर्स’ यूनिट ने पूरे ऑपरेशन को सावधानी से पूरा किया और चारों कैडेट्स को सुरक्षित निकाल लिया। समय पर मदद मिलने से उन्हें आगे की मेडिकल सहायता मिल सकी।
दरअसल, चारों कैडेट्स ‘अपराजिता परांग ला 2026’ नाम के ऑल इंडिया हाई-एल्टीट्यूड ट्रेकिंग अभियान का हिस्सा थीं। यह करीब 30 दिनों और 250 किलोमीटर का लंबा अभियान है। इसमें तीन महिला अधिकारी और 28 छात्रा कैडेट्स शामिल हैं। इस अभियान के दौरान कैडेट्स को लद्दाख के कई कठिन इलाकों से गुजरना है। रास्ते में ग्लेशियर, बर्फीले मैदान, नदी घाटियां और ऊंचे पहाड़ी रास्ते शामिल हैं। अभियान में करीब 18,300 फीट ऊंचे परांग ला पास को पार करना भी शामिल है।
यह अभियान युवाओं को कठिन परिस्थितियों में काम करने, हिम्मत बनाए रखने और टीम के साथ आगे बढ़ने का अनुभव देने के लिए आयोजित किया गया है। इसे 18 अगस्त को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली से रवाना किया था। अभियान के दौरान चार कैडेट्स की तबीयत खराब होने पर IAF की मदद बेहद महत्वपूर्ण रही। 18,500 फीट जैसी ऊंचाई पर जाकर चारों कैडेट्स को सुरक्षित निकालना भारतीय वायुसेना के लिए भी एक चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन था। समय पर की गई कार्रवाई के चलते सभी चार NCC कैडेट्स को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।





