चित्रकूट में फिर होगी सरयू नदी की तलाश, सैटेलाइट और रोवर तकनीक से होगा वैज्ञानिक सर्वे

चित्रकूट में पुरानी सरयू नदी की धारा को खोजने और उसके अस्तित्व से जुड़े प्रमाण जुटाने के लिए अब आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा। इसके लिए संबंधित विभाग वैज्ञानिक सर्वे की तैयारी कर रहा है। सर्वे में सैटेलाइट सिग्नल और रोवर तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके जरिए जमीन के नीचे और आसपास के क्षेत्र में नदी की पुरानी धारा, जलस्रोतों और पानी के प्राकृतिक रास्तों का पता लगाने की कोशिश होगी। इसका उद्देश्य यह समझना है कि पहले सरयू नदी किस रास्ते से बहती थी और समय के साथ उसकी धारा किस तरह प्रभावित हुई।

बताया जा रहा है कि सरयू नदी की लंबाई करीब 5 किलोमीटर रही है। यह नदी कामदगिरि पर्वत क्षेत्र से निकलकर राघव प्रयागघाट के पास मंदाकिनी नदी में मिलती थी। इसी क्षेत्र में पयश्वनी नदी भी मंदाकिनी में मिलती थी, जिसके कारण यहां तीन नदियों के संगम को त्रिवेणी के रूप में देखा जाता है। पुराने समय में सरयू और पयश्वनी से जुड़े कई प्राकृतिक जलस्रोत सक्रिय रहते थे और उनका पानी मंदाकिनी तक पहुंचता था। इससे क्षेत्र में जल प्रवाह बना रहता था और स्थानीय जल व्यवस्था को भी मदद मिलती थी।

समय के साथ अतिक्रमण, कंक्रीट निर्माण और प्राकृतिक जलमार्गों में बदलाव के कारण नदी की पुरानी धारा प्रभावित होने की बात सामने आई है। अब वैज्ञानिक सर्वे के बाद यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि नदी का वास्तविक पुराना रास्ता कहां था और किन स्थानों पर जल प्रवाह बाधित हुआ है। सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर आगे नदी के पुराने रास्ते को दोबारा विकसित करने, जलस्रोतों को बचाने और जरूरत पड़ने पर अतिक्रमण हटाने की योजना बनाई जा सकती है। अगर यह प्रयास सफल होता है, तो इससे चित्रकूट में जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन को बढ़ावा मिल सकता है और क्षेत्र की प्राकृतिक जल व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।