एक साल तक हर प्लास्टिक का टुकड़ा संभालता रहा शख्स, जमा हुए 4,490 टुकड़े; प्रयोग बना प्लास्टिक के खिलाफ आंदोलन

ब्रिटेन के डेनियल वेब ने यह जानने के लिए एक अनोखा प्रयोग शुरू किया कि रोजमर्रा की जिंदगी में एक इंसान आखिर कितना प्लास्टिक कचरा पैदा करता है। उन्होंने पूरे एक साल तक वह हर प्लास्टिक का टुकड़ा संभालकर रखा, जिसे आम तौर पर इस्तेमाल करने के बाद फेंक दिया जाता। एक साल पूरा होने पर उनके पास प्लास्टिक के कुल 4,490 टुकड़े जमा हो चुके थे।

वेब का यह प्रयोग 2017 में शुरू हुआ था। उन्होंने अपने इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक को फेंकने के बजाय धोकर अलग-अलग जमा किया और बाद में उसका अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि औसतन करीब 12 प्लास्टिक वस्तुएं रोजाना उनके कचरे का हिस्सा बन रही थीं। इस छोटे से व्यक्तिगत प्रयोग ने यह दिखा दिया कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी चीजें मिलकर कितना बड़ा कचरा पैदा कर सकती हैं।जमा किए गए 4,490 टुकड़ों में करीब 93 प्रतिशत प्लास्टिक सिंगल यूज पैकेजिंग का हिस्सा था। इनमें खाने-पीने की चीजों के रैपर, पैकेट, ब्रेड बैग, सब्जियों की पैकेजिंग और दूसरी रोजमर्रा की वस्तुओं की प्लास्टिक पैकिंग शामिल थी। कुल प्लास्टिक का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग से जुड़ा था।

वेब के लिए सबसे बड़ा झटका सिर्फ प्लास्टिक की मात्रा नहीं थी, बल्कि यह देखना था कि इनमें से ज्यादातर चीजें कुछ मिनटों या घंटों के इस्तेमाल के बाद कचरे में बदल गई थीं। उनके मुताबिक, जब पूरा प्लास्टिक एक जगह इकट्ठा हुआ तो रोजमर्रा की खपत और कचरे के बीच का संबंध अचानक बहुत साफ दिखाई देने लगा। उनका कहना था कि प्लास्टिक का इस्तेमाल इतना सामान्य हो गया है कि हम अक्सर यह सोचते ही नहीं कि इस्तेमाल के बाद उसका क्या होता है।

इस प्रयोग ने बाद में Everyday Plastic नाम की पहल का रूप लिया। वेब ने अपने अनुभव को लोगों तक पहुंचाने के लिए जमा किए गए प्लास्टिक को एक बड़े सार्वजनिक प्रदर्शन में बदल दिया। उनका उद्देश्य लोगों को यह समझाना था कि प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने का समाधान सिर्फ रीसाइक्लिंग पर निर्भर नहीं हो सकता, बल्कि प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करना भी जरूरी है।

इसी पहल से आगे चलकर The Big Plastic Count जैसे बड़े अभियान को प्रेरणा मिली। 2022 में Everyday Plastic और Greenpeace ने मिलकर इसे शुरू किया, जिसमें लोगों को अपने घर से निकलने वाले प्लास्टिक को गिनने के लिए प्रेरित किया गया। संगठन के अनुसार, अब तक करीब पांच लाख लोग इसमें हिस्सा ले चुके हैं और 1.1 करोड़ से ज्यादा प्लास्टिक के टुकड़े गिने जा चुके हैं।

डेनियल वेब का एक साल का प्रयोग इसलिए खास बन गया क्योंकि इसमें प्लास्टिक प्रदूषण को किसी बड़े आंकड़े के बजाय एक इंसान के रोजमर्रा के जीवन के जरिए दिखाया गया। 4,490 छोटे-छोटे टुकड़ों ने यह सवाल खड़ा किया कि अगर एक व्यक्ति के इस्तेमाल से इतना प्लास्टिक निकल सकता है, तो लाखों-करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की खपत मिलकर कितना बड़ा कचरा पैदा करती होगी। इसी सोच ने एक निजी प्रयोग को व्यापक पर्यावरण जागरूकता अभियान में बदल दिया।