बर्नी सैंडर्स के ‘आधी अमेरिका से ज्यादा दौलत’ वाले दावे पर एलन मस्क का जवाब, बोले- मेरे पास नकद का ढेर नहीं

अमेरिका में अरबपतियों की संपत्ति और बढ़ती आर्थिक असमानता को लेकर चल रही बहस के बीच टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स के एक बयान पर प्रतिक्रिया दी है। सैंडर्स ने दावा किया था कि मस्क के पास अमेरिका के सबसे निचले 50 प्रतिशत परिवारों की कुल संपत्ति से भी ज्यादा संपत्ति है। मस्क ने इस दावे को सीधे खारिज करने के बजाय अपनी संपत्ति की प्रकृति समझाते हुए कहा कि उनके पास नकदी का कोई बड़ा ढेर नहीं है।

सैंडर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था कि एक व्यक्ति, यानी एलन मस्क, अमेरिकी परिवारों के निचले आधे हिस्से से अधिक संपत्ति का मालिक है। उन्होंने इसी के साथ अमेरिका में आर्थिक असमानता, महंगाई और आम लोगों की वित्तीय परेशानियों का मुद्दा भी उठाया और कहा कि देश को बेहतर व्यवस्था की जरूरत है।

मस्क ने जवाब देते हुए कहा, “मेरे पास SpaceX और Tesla के शेयर हैं, नकदी का कोई बड़ा ढेर नहीं है।” उनका कहना था कि उनकी कुल संपत्ति का बड़ा हिस्सा इन कंपनियों में उनकी हिस्सेदारी से जुड़ा है। यानी उनकी नेटवर्थ को बैंक खाते में मौजूद नकदी के रूप में समझना सही नहीं होगा।

मस्क ने आगे तर्क दिया कि उनकी कंपनियों का अनुमानित भविष्य मूल्य बढ़ने के साथ उनके शेयरों की कीमत बढ़ती है। उन्होंने कहा कि इससे सिर्फ उन्हें ही फायदा नहीं होता, बल्कि कंपनी के दूसरे शेयरधारकों को भी लाभ मिलता है। मस्क ने खास तौर पर रिटायरमेंट और पेंशन कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें से कई फंड भी ऐसी कंपनियों के शेयर रखते हैं।मस्क की यह दलील उनकी संपत्ति को लेकर पहले दिए गए एक बयान से भी मेल खाती है। फरवरी 2026 में उन्होंने कहा था कि उनकी नेटवर्थ लगभग पूरी तरह Tesla और SpaceX में उनकी हिस्सेदारी से आती है और उनकी संपत्ति का 0.1 प्रतिशत से भी कम हिस्सा नकदी में है।

दूसरी ओर, बर्नी सैंडर्स लंबे समय से अरबपतियों की संपत्ति पर ज्यादा टैक्स लगाने की वकालत करते रहे हैं। अप्रैल 2026 में उन्होंने 938 अमेरिकी अरबपतियों पर 5 प्रतिशत वेल्थ टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा था और दावा किया था कि इससे 10 साल में करीब 4.4 ट्रिलियन डॉलर जुटाए जा सकते हैं। सैंडर्स का तर्क है कि अमेरिका में संपत्ति का बड़ा हिस्सा बेहद कम लोगों के पास केंद्रित हो गया है।

इस बहस का अहम पहलू यह है कि अरबपतियों की नेटवर्थ आम तौर पर उनके शेयरों और अन्य परिसंपत्तियों के बाजार मूल्य के आधार पर तय होती है। इसलिए शेयरों की कीमत में बदलाव के साथ उनकी कागजी संपत्ति भी तेजी से बढ़ या घट सकती है। मस्क का कहना है कि उनकी संपत्ति कंपनियों में हिस्सेदारी के रूप में है, जबकि सैंडर्स इस संपत्ति के विशाल आकार को अमेरिका में बढ़ती आर्थिक असमानता के उदाहरण के तौर पर देखते हैं।

मस्क और सैंडर्स के बीच यह ताजा बहस अमेरिका में अरबपतियों की संपत्ति, शेयर बाजार और वेल्थ टैक्स को लेकर चल रही व्यापक राजनीतिक बहस को फिर सामने ले आई है। एक तरफ मस्क अपनी संपत्ति को कंपनियों की हिस्सेदारी और उससे जुड़े शेयरधारकों के संदर्भ में देखते हैं, वहीं सैंडर्स इसे आर्थिक शक्ति और संपत्ति के असमान वितरण के मुद्दे से जोड़ रहे हैं।