₹250 करोड़ प्रति किमी’ वाले द्वारका एक्सप्रेसवे पर बारिश का पानी, सुरंग में फंसे कांग्रेस सांसद ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

नई दिल्ली में शुक्रवार को हुई भारी बारिश ने कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा कर दी। इसी दौरान कांग्रेस सांसद बृजेंद्र सिंह द्वारका एक्सप्रेसवे की एक सुरंग में फंस गए। उन्होंने मौके का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर सड़क निर्माण और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए।

बृजेंद्र सिंह ने वीडियो पोस्ट करते हुए दावा किया कि वह करीब एक घंटे से सुरंग में फंसे हुए हैं और वहां भारी मात्रा में पानी जमा है। उन्होंने लिखा कि जिस सुरंग में वह फंसे हैं, उसे मोदी सरकार ने करीब ₹250 करोड़ प्रति किलोमीटर की लागत से बनवाया है। सांसद ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा द्वारका एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के समय किए गए दावों से जोड़ते हुए सरकार पर तंज कसा।

सांसद ने अपने पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने द्वारका एक्सप्रेसवे के उद्घाटन को लोगों की जिंदगी का ‘गियर बदलने’ वाला कदम बताया था, लेकिन बारिश के दौरान उसी एक्सप्रेसवे की सुरंग में जलभराव की स्थिति सामने आ गई। उनके वीडियो में सड़क पर पानी जमा दिखाई दे रहा था और वाहनों की आवाजाही प्रभावित नजर आई।

₹250 करोड़ प्रति किलोमीटर की लागत का मुद्दा हालांकि नया नहीं है। 2023 में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट को लेकर द्वारका एक्सप्रेसवे की लागत पर बड़ा राजनीतिक विवाद हुआ था। CAG के अनुसार परियोजना की सिविल लागत लगभग ₹250.77 करोड़ प्रति किलोमीटर बताई गई थी, जबकि केंद्र सरकार ने इस गणना और तुलना पर आपत्ति जताई थी।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने उस समय कहा था कि ₹18.2 करोड़ प्रति किलोमीटर की राशि द्वारका एक्सप्रेसवे के लिए विशेष रूप से मंजूर लागत नहीं थी, बल्कि भारतमाला परियोजना के लिए निर्धारित एक सामान्य ‘नॉर्मेटिव कॉस्ट’ थी। मंत्रालय के मुताबिक द्वारका एक्सप्रेसवे में एलिवेटेड रोड, सुरंग, फ्लाईओवर और अन्य जटिल इंजीनियरिंग संरचनाएं शामिल हैं, जिसके कारण इसकी वास्तविक लागत सामान्य सड़क परियोजनाओं से अधिक है।

अब भारी बारिश के दौरान एक्सप्रेसवे की सुरंग में पानी भरने का वीडियो सामने आने के बाद यह पुराना लागत विवाद एक बार फिर राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। कांग्रेस सांसद ने इसे सरकार की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और उनके रखरखाव पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल किया है। हालांकि, जलभराव के कारण और इसके लिए जिम्मेदार तकनीकी या ड्रेनेज संबंधी खामियों को लेकर किसी स्वतंत्र जांच का निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।