
दिल्ली सरकार ने राजधानी में स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ नागरिकों को भारी-भरकम बिजली बिलों से स्थायी राहत दिलाने के उद्देश्य से ‘दिल्ली सोलर पॉलिसी’ के तहत एक दूरगामी पहल की शुरुआत की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के रिहायशी इलाकों की छतों पर सोलर पैनल की स्थापना को आसान बनाना है, ताकि आम उपभोक्ता अपनी आवश्यकता की बिजली खुद पैदा कर सकें। वर्तमान में जो उपभोक्ता प्रति माह 200 से 400 यूनिट तक बिजली की खपत करते हैं और आधा बिल चुकाते हैं, वे सोलर पैनल लगवाकर अपने महीने के बिजली बिल को पूरी तरह से शून्य (‘0’) कर सकते हैं। यह कदम न केवल मध्यम और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों के घरेलू बजट को बड़ी मजबूती प्रदान करेगा, बल्कि लंबे समय में ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भी सुनिश्चित करेगा।इस योजना की सबसे खास बात यह है कि यह उपभोक्ताओं को केवल मुफ़्त बिजली तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें ऊर्जा उत्पादक बनाकर अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर भी देती है। नीति के अंतर्गत जेनरेशन-बेस्ड इंसेंटिव (GBI) का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत यदि आपकी छत पर स्थापित सोलर पैनल आपकी दैनिक खपत से अधिक बिजली का उत्पादन करते हैं, तो वह अतिरिक्त बिजली स्वतः ही मुख्य ग्रिड में सप्लाई हो जाती है। बिजली कंपनियां (DISCOMs) इस अतिरिक्त बिजली के बदले प्रति यूनिट के हिसाब से उपभोक्ता के खाते में पैसे जमा करती हैं या आगामी बिलों में एडजस्ट करती हैं। इस प्रकार, उपभोक्ता बिजली बिल बचाने के साथ-साथ हर महीने एक निश्चित पैसिव इनकम भी हासिल कर सकते हैं।योजना का लाभ उठाने के लिए पूरी आवेदन प्रक्रिया को बेहद सरल और पारदर्शी बनाया गया है। इच्छुक नागरिक अपनी संबंधित बिजली वितरण कंपनी (जैसे BSES यमुना, BSES राजधानी, या TPDDL) के आधिकारिक वेब पोर्टल पर जाकर अपने बिजली बिल के CA नंबर के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण के बाद सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त अधिकृत वेंडर उपभोक्ता के घर का दौरा करके छत की क्षमता, धूप की उपलब्धता और आवश्यक सोलर पैनल का सर्वे करते हैं। सर्वे के बाद नेट-मीटरिंग तकनीक के साथ सोलर सिस्टम स्थापित कर दिया जाता है, जिससे उत्पादित और खपत की गई बिजली का सटीक हिसाब रखा जा सके। आर्थिक लाभ के साथ-साथ, यह पहल दिल्ली में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाकर कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी लाएगी, जिससे शहर की वायु गुणवत्ता और पर्यावरण में सुधार होगा।





