गुजरात हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ‘बुर्के में चेहरा नहीं दिखा’, एसिड अटैक की दोषी महिला की सजा पर लगाई रोक

गुजरात हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ‘बुर्के में चेहरा नहीं दिखा’, एसिड अटैक की दोषी महिला की सजा पर लगाई रोकगुजरात हाईकोर्ट ने एक एसिड अटैक मामले की सुनवाई करते हुए आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़ा एक बेहद अहम और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराई गई महिला की सजा के क्रियान्वयन (execution of sentence) पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान मामले की निष्पक्षता और साक्ष्यों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया और पाया कि वारदात के वक्त हमलावर बुर्का पहने हुए था, जिसके कारण पीड़िता या मौके पर मौजूद गवाहों के लिए चेहरा देख पाना संभव नहीं था।निचली अदालत ने महिला को इस गंभीर अपराध का दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि केवल शक और परिस्थितिजन्य बयानों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, खासकर तब जब आरोपी का चेहरा ही ढका हुआ था। हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि फौजदारी कानून के तहत किसी भी आरोपी की संलिप्तता और उसकी सटीक पहचान बिना किसी तार्किक संदेह (beyond reasonable doubt) के साबित होना अनिवार्य है।अदालत ने अपने आदेश में यह भी रेखांकित किया कि बुर्का पहने होने के कारण जब पहचान सुनिश्चित ही नहीं की जा सकी, तो आरोपी को संदेह का लाभ मिलना चाहिए। महज अनुमान या अस्पष्ट गवाही के आधार पर किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं छीनी जा सकती। इस कानूनी बिंदु को ध्यान में रखते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने दोषी महिला की सजा पर रोक लगाते हुए उसे अंतरिम राहत प्रदान की है। यह फैसला आने वाले समय में पहचान से जुड़े कानूनी मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर साबित होगा।