कांवड़ लेकर ताजमहल पहुंचीं अखिल भारत हिन्दू महासभा की 11 महिलाएं, जलाभिषेक की मांग पर पुलिस ने रोका

सावन माह के दौरान अखिल भारत हिन्दू महासभा की 11 महिला कार्यकर्ता कांवड़ लेकर ताजमहल पहुंचीं और ताजमहल को “तेजोमहालय भगवान शिव मंदिर” बताते हुए परिसर में जलाभिषेक करने की मांग की। सुरक्षा व्यवस्था में तैनात पुलिस और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों ने उन्हें ताजमहल परिसर में प्रवेश कर धार्मिक अनुष्ठान करने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद मौके पर कुछ देर तक नारेबाजी और बहस का माहौल बना, लेकिन स्थिति को नियंत्रित रखा गया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ताजमहल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित विश्व धरोहर स्मारक है, जहां निर्धारित नियमों के अनुसार किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं है। इसी वजह से महिला कार्यकर्ताओं को परिसर में जलाभिषेक करने से रोक दिया गया। सुरक्षा के मद्देनज़र ताजमहल के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया।

इस समूह में हिन्दूवादी नेता मीरा राठौर भी शामिल थीं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मीरा राठौर पहले भी विभिन्न मुद्दों को लेकर चर्चा में रही हैं। उनके खिलाफ अतीत में एक शराब कारोबारी से कथित रंगदारी मांगने के मामले में कार्रवाई हुई थी और वह उस मामले में जेल भी जा चुकी हैं। हालांकि, वर्तमान विरोध प्रदर्शन का उस पुराने मामले से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं बताया गया है।

गौरतलब है कि ताजमहल को लेकर “तेजोमहालय” होने का दावा कई वर्षों से समय-समय पर कुछ संगठनों और व्यक्तियों द्वारा किया जाता रहा है। वहीं, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और सरकार का आधिकारिक रुख यह है कि ताजमहल एक मुगलकालीन स्मारक है, जिसका निर्माण 17वीं शताब्दी में सम्राट शाहजहां ने कराया था। “तेजोमहालय” संबंधी दावों को भारतीय न्यायालयों ने भी अब तक स्वीकार नहीं किया है।

घटना के बाद पुलिस ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना और संरक्षित स्मारक के नियमों का पालन कराना उनकी प्राथमिकता है। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी संगठन या व्यक्ति को नियमों का उल्लंघन कर परिसर में धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। फिलहाल पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सामान्य है और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है