इलाहाबाद हाईकोर्ट में ₹900 करोड़ के कथित कोडीन युक्त कफ सिरप तस्करी मामले की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने मामले से जुड़ी कई जमानत याचिकाओं की सुनवाई से स्वयं को अलग (रिक्यूज़) कर लिया। उन्होंने अपने आदेश में कहा कि यह घटना “इस अदालत के इतिहास का एक काला दिन” है।
अदालत के आदेश के अनुसार, सभी जमानत याचिकाओं पर सुनवाई पूरी हो चुकी थी और फैसला सुरक्षित रखा गया था। इसी दौरान कथित रूप से कुछ पक्षों द्वारा न्यायाधीश तक निजी तौर पर पहुंचने या प्रभाव डालने की कोशिश किए जाने की जानकारी सामने आई। न्यायमूर्ति ने कहा कि यदि किसी लंबित मामले में न्यायाधीश तक निजी पहुंच बनाने का प्रयास किया जाता है, तो इससे न्यायपालिका की निष्पक्षता और जनता के विश्वास पर गंभीर असर पड़ता है।
अपने आदेश में न्यायमूर्ति ने कहा कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का बाहरी प्रभाव या निजी संपर्क न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता पर सीधा आघात है। इसी कारण उन्होंने निष्पक्षता बनाए रखने के लिए मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया।
इसके बाद संबंधित सभी जमानत याचिकाओं को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष नई पीठ के गठन के लिए भेज दिया गया है। अब इन मामलों की सुनवाई दूसरी पीठ करेगी।
यह मामला कथित ₹900 करोड़ के कोडीन युक्त कफ सिरप तस्करी नेटवर्क से जुड़ा है, जिसकी जांच विभिन्न एजेंसियां कर रही हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस मामले में बड़ी संख्या में आरोपियों की गिरफ्तारी और कई कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। हालांकि, मामले में आरोपों का अंतिम निर्णय अदालत में सुनवाई पूरी होने के बाद ही होगा।





