उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच राष्ट्रीय लोक दल (RLD) और भाजपा के बीच सीट बंटवारे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि जयंत चौधरी की पार्टी ने करीब 36 सीटों की मांग रखी है, हालांकि इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि न तो भाजपा और न ही आरएलडी ने की है।
जयंत चौधरी पहले ही साफ कर चुके हैं कि आगामी चुनाव में भाजपा-आरएलडी गठबंधन बरकरार रहेगा। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोनों दलों के बीच सीटों का अंतिम फार्मूला क्या होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट वोट बैंक पर आरएलडी की पकड़ को देखते हुए पार्टी अधिक सीटों की मांग कर सकती है। दूसरी ओर भाजपा को अपने मौजूदा विधायकों, क्षेत्रीय नेताओं और अन्य सहयोगी दलों—जैसे अपना दल (एस) और निषाद पार्टी—के हितों का भी ध्यान रखना होगा। ऐसे में सीट बंटवारा आसान नहीं माना जा रहा है।
भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि सहयोगियों को सम्मानजनक हिस्सेदारी देने के साथ-साथ अपने संगठन को भी संतुष्ट रखा जाए। यदि किसी एक सहयोगी को अपेक्षा से अधिक सीटें मिलती हैं, तो अन्य सहयोगी दल भी अपनी मांगें बढ़ा सकते हैं। इसलिए अंतिम फैसला राजनीतिक समीकरण, पिछले चुनावी प्रदर्शन और जीत की संभावनाओं को ध्यान में रखकर लिया जा सकता है।
फिलहाल भाजपा और आरएलडी के नेताओं की ओर से सीटों की संख्या पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए 36 सीटों की मांग को अभी मीडिया रिपोर्टों और राजनीतिक चर्चाओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि अंतिम निर्णय के रूप में।
आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच बातचीत के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में भाजपा और आरएलडी के बीच सीटों का अंतिम बंटवारा किस फार्मूले के तहत होगा।





