देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में कथित पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों को लेकर देशभर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। वहीं, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर भी छात्रों का आंदोलन जारी है। ऐसे में कई छात्र और राजनीतिक दल यह सवाल उठा रहे हैं कि “NEET पर इतना हंगामा हुआ, लेकिन JPSC के मामले को उतना राष्ट्रीय ध्यान क्यों नहीं मिला?”
विश्लेषकों के अनुसार, इसका एक बड़ा कारण दोनों परीक्षाओं का दायरा है। NEET एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है, जिसमें देशभर के लाखों छात्र शामिल होते हैं। इसलिए इससे जुड़ी किसी भी कथित गड़बड़ी का असर पूरे देश में दिखाई देता है और मामला राष्ट्रीय बहस का विषय बन जाता है।
दूसरी ओर, JPSC झारखंड राज्य की लोक सेवा आयोग परीक्षा है। इसका प्रभाव मुख्य रूप से राज्य के अभ्यर्थियों तक सीमित रहता है। हालांकि, हाल के दिनों में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर रांची में छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।
छात्र संगठनों का कहना है कि चाहे परीक्षा राष्ट्रीय स्तर की हो या राज्य स्तर की, यदि अनियमितताओं के आरोप हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका तर्क है कि हर अभ्यर्थी को समान अवसर और पारदर्शी चयन प्रक्रिया मिलनी चाहिए।
वहीं, कुछ राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया है कि अलग-अलग परीक्षाओं के मामलों को अलग तरीके से देखा जा रहा है। दूसरी ओर, सरकार और संबंधित संस्थाओं का कहना है कि जहां भी शिकायतें मिली हैं, वहां जांच और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
फिलहाल JPSC से जुड़े मामलों में जांच और विरोध प्रदर्शन जारी हैं, जबकि NEET विवाद में भी विभिन्न एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रियाओं के माध्यम से कार्रवाई हुई है। ऐसे में यह कहना कि किसी एक मामले की पूरी तरह अनदेखी की गई या दूसरे को अधिक महत्व दिया गया, एक राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का विषय है। इसका अंतिम आकलन उपलब्ध तथ्यों, जांच रिपोर्टों और संबंधित संस्थाओं की कार्रवाई के आधार पर ही किया जा सकता है।





